पंजाब में धान की बुआई के लिए खाद की आपूर्ति पर चिंता
चंडीगढ़ में खाद की उपलब्धता पर चर्चा
चंडीगढ़: जैसे ही पंजाब में धान की बुआई का समय नजदीक आता है, खाद की उपलब्धता एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गई है। किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर डीएपी और यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस महत्वपूर्ण कृषि चरण में खाद की कमी किसानों के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है।
कृषि जरूरतों पर जोर
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में पंजाब की वर्तमान कृषि आवश्यकताओं का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि धान की बुआई के समय किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक में चर्चा
ढिल्लों ने पत्र में उल्लेख किया कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि केंद्र सरकार पहले से ही खाद की आपूर्ति को लेकर सक्रिय है, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए अतिरिक्त कदम उठाना आवश्यक है।
जून-जुलाई में खाद की मांग में वृद्धि
पंजाब में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जिसके कारण जून और जुलाई के दौरान डीएपी और यूरिया की मांग काफी बढ़ जाती है। यदि इस समय आपूर्ति में कोई बाधा आती है, तो किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ सकता है, जिससे खेती का कार्य प्रभावित होता है।
कालाबाजारी का खतरा
खाद की कमी होने पर कुछ लोग इसका अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। ढिल्लों ने पत्र में आशंका जताई कि सीमित उपलब्धता के कारण जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत चुकानी पड़ती है, जिससे उनकी लागत में वृद्धि होती है।
फसल उत्पादन पर प्रभाव
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि समय पर खाद की उपलब्धता न होने से बुआई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि किसानों के हित में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि खाद की उपलब्धता सुचारु बनी रहे और कृषि कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
