पंजाब में नशा तस्करी के खिलाफ जनभागीदारी से बढ़ी कार्रवाई
पंजाब सरकार की नई पहल
पंजाब सरकार ने नशा तस्करी पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ जनभागीदारी को भी एक महत्वपूर्ण साधन बनाया है। सेफ पंजाब व्हाट्सएप हेल्पलाइन और गांवों में चल रहे ई-रिक्शा सूचना अभियानों के माध्यम से लोग बिना अपनी पहचान उजागर किए नशा कारोबार से संबंधित जानकारी साझा कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से पुलिस को नए सुराग मिल रहे हैं और ऐसे क्षेत्रों में भी पहुंच बन रही है, जहां पहले कार्रवाई करना कठिन माना जाता था।
गुप्त सूचनाओं से बढ़ी कार्रवाई की गति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 43,520 गुप्त सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। जांच के बाद 17,120 मामले दर्ज किए गए हैं और 21,962 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हर सूचना का पहले सत्यापन किया जाता है। सही पाए जाने पर संबंधित जिला पुलिस को तुरंत कार्रवाई के लिए भेजा जाता है।
व्हाट्सएप हेल्पलाइन का महत्व
'युद्ध नशियां विरुद्ध' अभियान के तहत शुरू की गई सेफ पंजाब व्हाट्सएप हेल्पलाइन लोगों को सुरक्षित तरीके से सूचना देने का विकल्प प्रदान कर रही है। पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाती है, जिससे अधिक लोग आगे आ रहे हैं। पुलिस का मानना है कि इससे नशा तस्करों के नेटवर्क तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हुआ है।
ई-रिक्शा अभियान का विस्तार
अभियान के दूसरे चरण में ई-रिक्शा सूचना तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पुलिस और प्रशासन के ई-रिक्शा अब तक लगभग 3,440 गांवों तक पहुंच चुके हैं। इनके माध्यम से लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर गुप्त सूचनाएं भी एकत्र की जा रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भरोसा और सहयोग दोनों में वृद्धि हुई है।
जनभागीदारी को प्राथमिकता
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में एक ही सूचना से कई आरोपितों तक पहुंच बनाई गई है। इसलिए गिरफ्तारियों की संख्या दर्ज मामलों से अधिक रही है। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था ने लोगों का विश्वास बढ़ाया है और अभियान को नई मजबूती मिली है।
स्थायी समाधान की दिशा में सरकार का प्रयास
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि समाज नशामुक्त पंजाब चाहता है। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जागरूकता, पुनर्वास और जनसहयोग को समान महत्व देकर ही नशे के खिलाफ स्थायी सफलता हासिल की जा सकती है।
