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पंजाब में नशे के खिलाफ महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

पंजाब सरकार का 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान अब समाज से मजबूत समर्थन प्राप्त कर रहा है, खासकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के कारण। महिलाएँ अपने परिवार के सदस्यों को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जिससे नई उम्मीदें जागृत हो रही हैं। कई प्रेरणादायक कहानियाँ सामने आई हैं, जैसे रागिनी कौर और बलविंदर कौर की, जिन्होंने अपने प्रियजनों को नशा मुक्ति केंद्र तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभियान में परिवार का सहयोग और पारिवारिक काउंसलिंग की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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समाज का समर्थन और नशे के खिलाफ अभियान


चंडीगढ़: पंजाब सरकार का 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान अब समाज से भी व्यापक समर्थन प्राप्त कर रहा है। विशेष रूप से, महिलाओं ने अपने परिवार के सदस्यों को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए उपचार के लिए प्रेरित किया है, जिससे नई उम्मीदें जागृत हुई हैं। कई परिवारों के अनुभव दर्शाते हैं कि भावनात्मक समर्थन, उचित चिकित्सा और निरंतर प्रोत्साहन से नशे की लत से मुक्ति संभव है। सरकार इस अभियान को जन भागीदारी से जोड़ने पर जोर दे रही है।


महिलाओं की सक्रिय भागीदारी

राज्य के विभिन्न जिलों से कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां माताओं, पत्नियों, बहनों और अन्य महिला सदस्यों ने अपने प्रियजनों को नशा मुक्ति केंद्र तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोगा में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में भी कई परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि परिवार का समर्थन मरीज के आत्मविश्वास को मजबूत करता है।


रागिनी कौर की प्रेरणादायक कहानी

लुधियाना की रागिनी कौर ने बताया कि शादी के बाद उन्हें अपने पति की नशे की लत का पता चला। लंबे संघर्ष के बाद, परिवार ने उन्हें नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया। उपचार के बाद उनके पति सामान्य जीवन में लौट आए। इस सफलता से प्रेरित होकर परिवार ने एक अन्य रिश्तेदार का भी इलाज कराया, जो अब नशे से मुक्त है।


बलविंदर कौर का संघर्ष

मोगा जिले के बुट्टर कलां गांव की बलविंदर कौर ने बताया कि नशे ने उनके परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से गंभीर नुकसान पहुँचाया। काउंसलिंग के दौरान परिवार की भूमिका को समझने के बाद, उन्होंने अपने पति का इलाज शुरू कराया। आज उनके पति स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। उनके प्रयास से पड़ोस का एक युवक भी हेरोइन की लत छोड़ने में सफल हुआ है।


परिवार का सहयोग और उपचार की सफलता

सरकार ने सभी सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में पारिवारिक काउंसलिंग को उपचार का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाइयों के साथ परिवार का भरोसा और भावनात्मक सहयोग मरीज को नशे की ओर लौटने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे पुनर्वास की सफलता भी बढ़ती है।


सरकार का समर्थन और महिलाओं की सराहना

लुधियाना के जिला नोडल मनोचिकित्सक डॉ. अरविंद गोयल ने कहा कि परिवार का साथ मरीज का आत्मविश्वास बढ़ाता है और उपचार को प्रभावी बनाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि महिलाओं ने इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दिया है। सरकार आगे भी उनकी भागीदारी बढ़ाकर नशामुक्त और खुशहाल पंजाब के लक्ष्य की दिशा में काम करती रहेगी।