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पंजाब में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर नियंत्रण के लिए नया अध्यादेश लागू

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि को रोकने के लिए नया अध्यादेश लागू किया है। इस अध्यादेश का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को वित्तीय बोझ से राहत देना है। नए नियमों के तहत, यदि स्कूल निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाते हैं, तो अतिरिक्त राशि वापस की जाएगी। मुख्यमंत्री ने शिक्षा को व्यवसाय में बदलने से रोकने की बात कही है। इस कदम का स्वागत करते हुए सांसद ने इसे अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताया है।
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पंजाब सरकार का नया कदम


पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा फीस में मनमानी वृद्धि को रोकने के लिए पंजाब गैर सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की फीस विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू किया है। यह अध्यादेश मंत्रिमंडल की मंजूरी और राज्यपाल की स्वीकृति के बाद प्रभाव में आया है।


शिक्षा में पारदर्शिता लाने का प्रयास

सरकार का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों पर पड़ने वाले अनावश्यक वित्तीय बोझ को कम करना है। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां सभी गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को पिछले चार वर्षों की फीस का विवरण अपलोड करना अनिवार्य होगा।


फीस वृद्धि की समीक्षा प्रक्रिया

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्कूल ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, तो उसकी समीक्षा की जाएगी। नए नियमों के अनुसार, यदि पिछले तीन वर्षों में किसी स्कूल ने सालाना पांच प्रतिशत से अधिक या कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, तो अतिरिक्त वसूली गई राशि एक महीने के भीतर अभिभावकों को वापस की जाएगी।


मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा सेवा का उद्देश्य विद्यार्थियों की भलाई है और इसे व्यवसाय में नहीं बदला जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। फीस वृद्धि से संबंधित शिकायतों की जांच संबंधित जिले के उपायुक्त द्वारा की जाएगी, ताकि हर मामले का निष्पक्ष और समय पर समाधान हो सके।


अभिभावकों के हित में अध्यादेश

आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने इस अध्यादेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर प्रभावी रोक लगेगी। उन्होंने इसे अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उनके अनुसार, नए कानून के लागू होने से फीस निर्धारण की प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी।