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पंजाब में बिछड़े तीन भाइयों की भावुक पुनर्मिलन की कहानी

पंजाब के तरनतारन जिले में एक अद्भुत घटना घटी जब 48 साल पहले बिछड़े तीन भाई फिर से मिले। यह भावुक पुनर्मिलन SIR प्रक्रिया के माध्यम से संभव हुआ, जिसने परिवार की किस्मत बदल दी। जानें कैसे छोटे भाई ने अपने बड़े भाइयों को खोजा और उनके बीच का बिछड़ाव समाप्त हुआ। इस कहानी में भावनाओं का गहरा समावेश है, जो हर किसी को छू लेगा।
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एक अद्भुत पुनर्मिलन


कभी-कभी जीवन ऐसे क्षण प्रस्तुत करता है जो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं होते। पंजाब के तरनतारन जिले में एक ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला, जब 48 साल पहले बिछड़े तीन भाई फिर से आमने-सामने आए। छोटा भाई, जो रोजगार की तलाश में घर छोड़कर गया था, अपने बड़े भाइयों और मां को हमेशा के लिए खो चुका मान लिया गया था। लेकिन SIR प्रक्रिया के दौरान एक साधारण रिकॉर्ड जांच ने पूरे परिवार की किस्मत बदल दी।


भाईयों का संघर्ष

गांव चौताला के भाग सिंह सेना में थे। उनके दो बड़े बेटे, बलविंदर और रजिंदर, भी बाद में सेना में भर्ती हुए। सबसे छोटे बेटे विजय सिंह ने 1978 में महज 16 साल की उम्र में रोजगार की तलाश में गांव छोड़ा। वह हरियाणा के पंचकूला जिले के मड़ावाले गांव पहुंचा और वहीं बस गया। समय के साथ उसने अपना परिवार भी बना लिया, जबकि उसके भाइयों का उससे संपर्क पूरी तरह टूट गया।


परिवार की निराशा

जब भी बलविंदर और रजिंदर छुट्टी पर गांव आते, वे अपने छोटे भाई की खोज करते, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती। समय बीतने के साथ, परिवार ने मान लिया कि शायद विजय और उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं। पिता भाग सिंह के निधन के समय भी दोनों ने काफी इंतजार किया, लेकिन जब विजय नहीं आए, तो बड़े भाइयों ने अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां खुद उठाईं।


SIR प्रक्रिया का जादू

हाल ही में, विजय कुमार को अपने पूर्वजों के रिकॉर्ड की आवश्यकता पड़ी। इस सिलसिले में वह अपने पैतृक गांव पहुंचे और वहां मौजूद बीएलओ से रिकॉर्ड मांगा। जांच के दौरान उन्हें बताया गया कि उनके पिता का निधन हो चुका है, लेकिन उनके दोनों बड़े भाई आज भी गांव में रह रहे हैं। यह सुनकर बीएलओ ने दोनों भाइयों को गांव के स्कूल में बुलाया। कुछ ही समय बाद, तीनों भाई एक-दूसरे के सामने खड़े थे। वर्षों का इंतजार एक पल में खत्म हो गया और तीनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर रोना शुरू कर दिया।


भावुक क्षण

स्कूल परिसर में मौजूद लोग इस भावुक दृश्य को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाए। SIR से जुड़े कर्मचारियों की आंखों में भी आंसू थे। विजय कुमार ने बताया कि वह अब हरियाणा में अपने बेटों और पोतों के साथ रहते हैं और लेंटर डालने के लिए लोहे का जाल तैयार करने का काम करते हैं। उन्होंने अपने भाइयों से वादा किया कि अगली बार वह पूरे परिवार के साथ गांव आएंगे।