पंजाब में मौसम में बदलाव: बारिश और गरज-चमक की संभावना
मौसम में बदलाव की चेतावनी
पंजाब में मौसम एक बार फिर बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 6 से 10 जुलाई के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश से सटे क्षेत्रों में गरज-चमक, तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना अधिक है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल सकता है।
कम दबाव का प्रभाव
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण पंजाब में मानसून फिर से सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है। पूर्वी और पहाड़ी क्षेत्रों से सटे जिलों में इसका प्रभाव अधिक रहने की संभावना है।
गर्मी का असर
बारिश की संभावना के बीच, शनिवार को राज्य के कई हिस्सों में गर्मी का प्रभाव भी बना रहा। बठिंडा में तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। फाजिल्का में 39.0 डिग्री, चंडीगढ़ में 37.9 डिग्री, पटियाला में 37.2 डिग्री और मोहाली में 37.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। अन्य जिलों में भी अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास रहा।
येलो अलर्ट जारी
6 से 9 जुलाई के बीच पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली और फतेहगढ़ साहिब में येलो अलर्ट जारी किया गया है। 8 जुलाई को पटियाला भी अलर्ट वाले जिलों में शामिल रहेगा। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और बारिश होने की संभावना जताई गई है।
बारिश का सिलसिला जारी रहेगा
मौसम विभाग के अनुसार, 10 जुलाई तक पंजाब के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। जिन जिलों में चेतावनी जारी की गई है, वहां लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने और बिजली चमकने या तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन और मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें। तेज हवाओं और बारिश के समय पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूरी बनाए रखना सुरक्षित रहेगा। सतर्कता बरतने से संभावित जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
