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पंजाब में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता

पंजाब में स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। लुधियाना और अमृतसर में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं, जबकि जालंधर और मोगा में मौतों की भी सूचना मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि निगेटिव रिपोर्ट के बावजूद लक्षण हो सकते हैं। जानें स्वाइन फ्लू के लक्षण, बचाव के उपाय और अस्पतालों की तैयारियों के बारे में।
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स्वाइन फ्लू के मामलों में वृद्धि


पंजाब में स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से वृद्धि ने स्वास्थ्य विभाग को चिंतित कर दिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में संक्रमण के मामलों की पुष्टि हुई है, जिसमें लुधियाना और अमृतसर सबसे प्रभावित हैं। इसके अलावा, जालंधर और मोगा में स्वाइन फ्लू से संबंधित मौतों की भी सूचना मिली है।


संक्रमित मरीजों की संख्या

लुधियाना में अब तक 35 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें से 18 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 17 मरीज अभी भी सक्रिय हैं। अमृतसर में इस वर्ष की शुरुआत से 25 मामले सामने आए हैं, जिनमें 20 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और 5 सक्रिय हैं।


जालंधर और मोगा में स्थिति

जालंधर में 13 संक्रमित मरीजों की पहचान हुई है, जिनमें से 12 अभी भी सक्रिय हैं। यहां एक 85 वर्षीय बुजुर्ग की स्वाइन फ्लू से मृत्यु हो चुकी है। मोगा में छह संक्रमित मरीजों की जानकारी मिली है। फरीदकोट में तीन मामले सामने आए हैं, जिनमें एक सक्रिय और दो ठीक हो चुके हैं। बठिंडा और फाजिल्का में दो-दो मामले सामने आए हैं, और दोनों जिलों में मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।


अस्पतालों की तैयारियों पर सवाल

बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज की तैयारियों को लेकर चिंताएं उठ रही हैं। कपूरथला और गुरदासपुर के सिविल अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध हैं, लेकिन तकनीकी कर्मचारियों की कमी की समस्या सामने आई है। अमृतसर में उपलब्ध 20 वेंटिलेटरों में से चार खराब बताए गए हैं।


निगेटिव रिपोर्ट के बावजूद लक्षण

विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह के अनुसार, स्वाइन फ्लू की जांच निगेटिव आने पर भी मरीज में फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं। संक्रमण के प्रारंभिक चरण में वायरस की मात्रा कम होने या सैंपल सही समय पर न लिए जाने के कारण रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है।


स्वाइन फ्लू के लक्षण

स्वाइन फ्लू के लक्षणों में अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, खांसी और गले में खराश शामिल हैं। कुछ मरीजों को सांस लेने में कठिनाई, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द और अत्यधिक थकान भी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में उल्टी, दस्त और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।


बचाव के उपाय

स्वाइन फ्लू और अन्य फ्लू संक्रमणों से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोने की सलाह दी जाती है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या कोहनी से ढकना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचना भी जरूरी है।


अगर किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो उससे दूरी बनाए रखना बेहतर है। खुद को बीमार महसूस होने पर घर पर आराम करें और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।


पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक आहार लेना और अच्छी नींद लेना भी महत्वपूर्ण है। फ्लू का टीका लगवाने के लिए डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।