Newzfatafatlogo

पंजाब विधानसभा सत्र बढ़ाने की मांग, छह विधेयकों पर चर्चा जरूरी

पंजाब विधानसभा के विधायक सुखपाल खैहरा ने सत्र को बढ़ाने की मांग की है ताकि छह महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की जा सके। उनका कहना है कि अंतिम दिन बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयकों को पारित करना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। खैहरा ने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की है कि विधायकों को इन विधेयकों का गहराई से अध्ययन करने का समय मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए सत्र को और दिनों तक बढ़ाया जाए।
 | 

सुखपाल खैहरा की अपील


चंडीगढ़: कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने पंजाब विधानसभा के मौजूदा सत्र को कुछ और दिनों के लिए बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतिम दिन छह महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना उचित चर्चा के पारित करना लोकतंत्र की सही प्रक्रिया नहीं है।


विधायकों की चर्चा की आवश्यकता

खैहरा ने विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां से अनुरोध किया कि सत्र की अवधि बढ़ाई जाए ताकि इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा हो सके। उन्होंने बताया कि सदन में छह नए विधेयक पेश किए गए हैं, जिनमें डिजिटल यूनिवर्सिटी, जीएसटी से संबंधित कानून, आउटसोर्स कर्मचारियों और संविदा नियुक्तियों से जुड़े विधेयक शामिल हैं।


महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की आवश्यकता

विधायक ने यह सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण कानूनों पर अंतिम दिन ही कैसे पर्याप्त चर्चा हो सकती है। उन्होंने कहा कि विधायकों को इन विधेयकों का गहराई से अध्ययन करने और संबंधित लोगों से बातचीत करने का पूरा समय मिलना चाहिए।


खैहरा का मानना है कि यदि सरकार इन विधेयकों को पंजाब के हित में समझती है, तो उसे सत्र बढ़ाने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए। महत्वपूर्ण कानूनों को जल्दबाजी में पारित करने के बजाय, सदन में उनके हर पहलू पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। इससे बेहतर कानून बन सकेंगे और जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।


सत्र की अवधि और लोकतांत्रिक प्रक्रिया

पंजाब विधानसभा में अक्सर सत्र कम दिनों का होता है, जिससे अंतिम दिन कई महत्वपूर्ण बिल एक साथ लाना और बिना चर्चा के पारित करना विपक्ष की आलोचना का विषय बनता है। सुखपाल खैहरा ने इस पर जोर देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चर्चा अत्यंत आवश्यक है। बिना सोच-विचार के कानून बनाने से भविष्य में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।


उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वह इन विधेयकों को और दिनों तक सदन में रखे, ताकि सभी पक्ष अपनी बात रख सकें। आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे राज्य के हजारों युवाओं को प्रभावित करते हैं। डिजिटल यूनिवर्सिटी और जीएसटी जैसे विषय भी आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं, इसलिए इन पर जल्दबाजी ठीक नहीं है।