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पाकिस्तान में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर का ध्वंस, VHP ने उठाई आवाज

पाकिस्तान में एक 100 साल पुराने हिंदू मंदिर के ध्वंस की घटना ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) को आक्रोशित कर दिया है। VHP ने आरोप लगाया है कि मंदिर को मदरसा बनाने के लिए गिराया गया। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। इस घटना के साथ ही पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और VHP की क्या मांगें हैं।
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पाकिस्तान में मंदिर के ध्वंस की घटना


पाकिस्तान में एक प्राचीन हिंदू मंदिर के ध्वंस की खबर सामने आई है, जिससे विश्व हिंदू परिषद (VHP) में आक्रोश फैल गया है। संगठन का आरोप है कि यह मंदिर, जो लगभग 100 साल पुराना था, को मदरसा बनाने के लिए गिराया गया। VHP ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।


VHP की चिंता और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति

VHP के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान में हिंदू और सिख समुदाय की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मंदिर को गिराने का उद्देश्य उसे हटाकर मदरसा बनाना था। हालांकि, इस मामले में मंदिर के स्थान और ध्वंस की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।


पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाने की अपील

सुरेंद्र जैन ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह पाकिस्तान सरकार के सामने यह मामला उठाए और वहां रहने वाले हिंदुओं और सिखों को धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिलाने की मांग करें। VHP ने यह भी कहा कि हाल के समय में पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों को लेकर भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं।


गुरुद्वारे के ध्वंस का मामला

एक रिपोर्ट में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक पुराने गुरुद्वारे के ध्वंस का भी उल्लेख किया गया है। पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने इस मामले में केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष मुद्दा उठाने की मांग की है। खन्ना ने गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण और वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।


रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित गुरुद्वारे को हटाकर वहां बाजार परिसर बनाने का दावा किया गया है। इस मामले ने पाकिस्तान में सिख समुदाय से जुड़े ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस क्षेत्र में पहले लगभग 12 गुरुद्वारे थे, वहां अब केवल दो रह गए हैं। धार्मिक संपत्ति की जमीन को निजी बिल्डर को देने के मामले में भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।