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फर्जी लोन ऐप मामले में आरोपितों की अदालत से अनुपस्थिति पर कार्रवाई तेज

चंडीगढ़ में फर्जी लोन ऐप मामले में कई आरोपितों की अदालत में अनुपस्थिति पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। चार साल पहले उजागर हुए इस साइबर रैकेट में शामिल प्रमुख आरोपितों में से कुछ अब भी सुनवाई से दूर हैं। जांच में यह सामने आया है कि यह रैकेट लोगों को तत्काल लोन का झांसा देकर उनके निजी डेटा का दुरुपयोग करता था। पुलिस ने इस मामले में हजारों शिकायतें प्राप्त की हैं और फरार आरोपितों की तलाश जारी है।
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फर्जी लोन ऐप मामले में आरोपितों की अदालत से अनुपस्थिति पर कार्रवाई तेज

चंडीगढ़ में फर्जी लोन ऐप का नया मोड़


चंडीगढ़: देशभर में आसान कर्ज का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले फर्जी लोन ऐप मामले में एक नया मोड़ आया है। चार साल पहले चंडीगढ़ पुलिस द्वारा उजागर किए गए इस बड़े साइबर रैकेट के कई आरोपित अब अदालत की कार्यवाही से दूर हो रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिनकी भूमिका जांच के दौरान महत्वपूर्ण मानी गई थी। अदालत ने गैरहाजिर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई को तेज कर दिया है।


गैरहाजिर आरोपियों पर अदालत का सख्त रुख

चंडीगढ़ जिला अदालत ने फर्जी लोन ऐप मामले में कई आरोपितों की लगातार अनुपस्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। जानकारी के अनुसार, भरत लखमनी, अर्जुन सेन, राज वैष्णव और सौरव कुमार झा लंबे समय से अदालत में पेश नहीं हुए हैं। इनमें से कुछ आरोपित जमानत मिलने के बाद से ही सुनवाई से दूरी बनाए हुए हैं।


ठगी का जाल देशभर में फैला

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह रैकेट लोगों को तत्काल लोन उपलब्ध कराने का झांसा देता था। जैसे ही कोई व्यक्ति ऐप डाउनलोड करता था, उसके मोबाइल का निजी डेटा आरोपितों के हाथ लग जाता था। इसके बाद इसी जानकारी का इस्तेमाल दबाव बनाने और वसूली के लिए किया जाता था। इस तरीके से हजारों लोगों को निशाना बनाया गया।


क्रिप्टो और शेल कंपनियों का उपयोग

पुलिस जांच में यह सामने आया कि ठगी से जुटाई गई रकम को विभिन्न बैंक खातों, फर्जी ट्रस्टों और शेल कंपनियों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता था। इसके बाद धनराशि को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया जाता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और आर्थिक अपराधों के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा था।


भरत लखमनी की भूमिका पर ध्यान

मामले के प्रमुख आरोपितों में से एक भरत लखमनी पर चीनी नागरिक वांग चेंगुआ को भारत से बाहर निकालने की कोशिश का आरोप है। जांच में पता चला था कि वह नेपाल सीमा तक उसे पहुंचाने में शामिल रहा। पुलिस के अनुसार, भरत का चीन से भी पुराना संबंध रहा है और उसने कुछ विदेशी नागरिकों के साथ व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की थीं।


हजारों शिकायतें और कई एफआईआर

इस रैकेट के खिलाफ देशभर से 1,500 से अधिक शिकायतें आई थीं। विभिन्न राज्यों में दर्ज दर्जनों मामलों के आधार पर व्यापक जांच शुरू की गई थी। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह की गतिविधियों से परेशान होकर कई लोगों ने आत्मघाती कदम तक उठाए। फिलहाल अदालत और जांच एजेंसियां फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हैं और मामले की सुनवाई जारी है।