Newzfatafatlogo

उत्तर प्रदेश के औरैया में दोहरे हत्याकांड में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 दोषी ठहराए गए

उत्तर प्रदेश के औरैया में हुए दोहरे हत्याकांड में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक सहित 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला 15 मार्च 2020 को नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में हुई गोलीबारी से जुड़ा है, जिसमें अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की मौत हो गई थी। इस मामले में सुनवाई छह साल तक चली, जिसमें 32 गवाहों ने गवाही दी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के फैसले के पीछे की कहानी।
 | 

विशेष अदालत का फैसला


औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया में हुए एक चर्चित दोहरे हत्या मामले में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक सहित 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा के इंतजाम बढ़ा दिए गए थे।


घटना का विवरण

यह मामला 15 मार्च 2020 का है, जब औरैया शहर के नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में दिनदहाड़े गोलीबारी हुई थी। इस घटना में अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की गोली लगने से मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने हत्या के अलावा जानलेवा हमले और आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले भी दर्ज किए थे। कमलेश पाठक समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जिसके बाद यह मामला औरैया के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक बन गया।


सुनवाई की प्रक्रिया

छह साल तक चली सुनवाई


विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में इस दोहरे हत्याकांड और उससे जुड़े मामलों की सुनवाई काफी समय तक चली। अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष को साबित करने के लिए 32 गवाहों को पेश किया, जबकि बचाव पक्ष ने 39 गवाहों के बयान दिए। इस मामले में एक नाबालिग आरोपी भी शामिल था, जिसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया है, जहां उसकी सुनवाई अलग से चल रही है।


बरी किए गए आरोपी

प्राणघातक हमले के मामले में बरी


दोहरे हत्याकांड के अलावा, पुलिस द्वारा दर्ज प्राणघातक हमले के मामले में अदालत ने छह आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें सत्येंद्र मिश्रा उर्फ डब्बू, राजेंद्र कुमार बाजपेई, रामचंद्र मिश्रा, आलोक चतुर्वेदी, शुभम दुबे और हरगोविंद उर्फ गुड्डू शामिल हैं। इस केस में आरोपी रवि चतुर्वेदी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। फैसले के मद्देनजर न्यायालय परिसर में पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूर्व एमएलसी को उम्रकैद की सजा मिलने की खबर के बाद उनके समर्थकों में भी सन्नाटा छा गया।