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उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जल जीवन मिशन के तहत 294 परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट फर्जी पाई गई है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। पूरे प्रदेश में जल जीवन मिशन योजना की जांच से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आ सकता है। जानें इस मामले में और क्या हुआ है और स्थानीय लोगों की क्या प्रतिक्रिया है।
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उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा

जल जीवन मिशन में खामियां उजागर

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कई खामियां सामने आ रही हैं, जिससे भ्रष्टाचार का मामला भी उजागर हो रहा है। हाल ही में पानी की टंकियों के गिरने और टूटने के वीडियो वायरल हुए हैं। अब 294 परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी फर्जी पाई गई है। यह मामला बाराबंकी का है, जहां एक समीक्षा बैठक में यह बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया। बाराबंकी के जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन के तहत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई।


इस बैठक में 294 परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसमें 80 प्रतिशत प्रगति दर्शाई गई थी। लेकिन कार्य रिपोर्ट और सत्यापन रिपोर्ट में अंतर पाया गया, जिसके बाद सहायक अभियंता को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कई परियोजनाओं में विभागीय प्रगति रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति के बीच भिन्नता पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि अगली समीक्षा बैठक से पहले सभी कमियों का समाधान सुनिश्चित किया जाए।


जल जीवन मिशन योजना पर उठ रहे सवाल
यह मामला केवल बाराबंकी तक सीमित नहीं है। यदि उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन योजना की सही जांच की जाए, तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आ सकता है। प्रगति रिपोर्ट के नाम पर अधिकारी जनता को गुमराह कर रहे हैं। प्रदेश के कई स्थानों पर पानी की टंकियां तक नहीं बनी हैं। कई जगहों पर पानी की सप्लाई के लिए पाइपलाइन भी नहीं डाली गई है, जिस पर स्थानीय लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ अनसुनी हो रही है।


पीएम की महत्वाकांक्षी योजना में धांधली
जल जीवन मिशन योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य लोगों तक स्वच्छ जल पहुंचाना है। लेकिन अधिकारियों ने इस योजना में धांधली कर बंदरबांट की है। यदि उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन योजना की जांच की जाए, तो कई अधिकारी बेनकाब हो सकते हैं। उन्होंने प्रगति रिपोर्ट के नाम पर जनता को गुमराह किया है, जबकि वास्तविकता इससे बहुत दूर है।