उत्तराखंड में चुनावी हलचल: क्या जल्द होंगे विधानसभा चुनाव?
राजनीतिक चर्चाओं का नया दौर
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति में हाल ही में एक नई बहस शुरू हुई है। विधानसभा चुनावों में अब कुछ महीने ही बचे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में समय से पहले चुनाव कराने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हालांकि, इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, फिर भी भाजपा और विपक्षी दलों की बढ़ती सक्रियता ने इस विषय को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, 2027 में प्रस्तावित जनगणना के मद्देनजर चुनावी कार्यक्रम में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
चुनाव और जनगणना का दबाव
सूत्रों का कहना है कि यदि जनगणना और विधानसभा चुनाव एक ही समय पर होते हैं, तो प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि चुनाव ड्यूटी और जनगणना दोनों में बड़ी संख्या में शिक्षक और सरकारी कर्मचारी शामिल होते हैं। ऐसे में, यदि दोनों कार्य एक साथ होते हैं, तो कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ सकता है। इसी कारण कुछ राज्यों में चुनाव पहले कराने का सुझाव दिया गया है।
राज्यों में चुनावी बदलाव की संभावना
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि गोवा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी चुनावी कार्यक्रम में बदलाव की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इन राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने वाला है, जबकि उसी समय जनगणना का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। यदि उत्तराखंड में चुनाव कुछ महीने पहले कराए जाते हैं, तो चुनावी ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को जनगणना से पहले पर्याप्त समय मिल सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं द्वारा ही लिया जाएगा।
भाजपा अध्यक्ष का मसूरी दौरा
इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पिछले तीन दिनों से मसूरी में हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें कीं। बैठक में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित करने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया गया। यह उनका उत्तराखंड का दूसरा दौरा है, जिससे राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आई है।
भाजपा की तीसरी बार सत्ता में वापसी की तैयारी
भाजपा उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार सरकार चला रही है और आगामी विधानसभा चुनाव में तीसरी बार सत्ता में आने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसी कारण संगठन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति को मजबूत बनाने में जुटा हुआ है।
कोर कमेटियों का गठन
संभावित चुनावी तैयारियों के तहत भाजपा ने राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए कोर कमेटियों का गठन कर दिया है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर इन समितियों की बैठकें भी शुरू हो चुकी हैं। इन बैठकों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा रही है। पार्टी का ध्यान जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर है।
कांग्रेस की चुनावी तैयारी
भाजपा की सक्रियता के बीच कांग्रेस भी अब चुनावी तैयारियों में तेजी लाती नजर आ रही है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा 17 और 18 जून को उत्तराखंड दौरे पर आ रही हैं। इस दौरान वह जिलाध्यक्षों और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें करेंगी। उनका उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करना है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व भी उत्तराखंड को लेकर गंभीर दिखाई दे रहा है। कुमारी शैलजा का यह दौरा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने और संगठन को चुनाव के लिए तैयार करने की कोशिश की जाएगी।
