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एसजीपीसी ने पाकिस्तान हाई कमीशन से 7500 सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा की मांग की

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने पाकिस्तान हाई कमीशन से 7500 सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा की प्रक्रिया में सकारात्मक प्रगति की जानकारी दी। एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि श्रद्धालुओं ने अपने पासपोर्ट जमा कर दिए हैं और पाकिस्तानी राजदूत ने सभी वीजा आवेदनों को मंजूरी देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बंद होने से सिख समुदाय में निराशा है, जिसे एसजीपीसी भारत सरकार के समक्ष उठाने का इरादा रखती है।
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हर वर्ष सिख श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान भेजती हैं एसजीपीसी


शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के अधिकारी शायदा अहमद वड़ैच से मुलाकात की। धामी ने बताया कि गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर पाकिस्तान जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए वीजा प्रक्रिया में सकारात्मक प्रगति हुई है।


7500 से अधिक श्रद्धालुओं ने पासपोर्ट जमा किए

धामी ने कहा कि नवंबर 2026 में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के लिए पाकिस्तान जाने के इच्छुक 7500 से अधिक सिख श्रद्धालुओं ने अपने पासपोर्ट एसजीपीसी कार्यालय में जमा कर दिए हैं। यह संख्या सिख समुदाय की गुरु साहिब और पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाती है।


वीजा आवेदनों को मंजूरी का आश्वासन

एसजीपीसी अध्यक्ष के अनुसार, पाकिस्तानी राजदूत ने बैठक में आश्वासन दिया कि शिरोमणि कमेटी द्वारा भेजे गए सभी वीजा आवेदनों को मंजूरी देने का प्रयास किया जाएगा। धामी ने इस सकारात्मक आश्वासन के लिए पाकिस्तानी राजदूत का आभार व्यक्त किया।


करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बंद होने से निराशा

धामी ने कहा कि हर सिख श्रद्धालु की इच्छा होती है कि वह उस पवित्र स्थान का दर्शन कर सके, जहां गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय बिताया। उन्होंने बताया कि एसजीपीसी ने पहले भी पासपोर्ट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है, लेकिन वर्तमान में करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बंद होने से सिख समुदाय में निराशा और रोष है।


भारत सरकार के समक्ष मुद्दा उठाएगी एसजीपीसी

धामी ने कहा कि शिरोमणि कमेटी इस मुद्दे को भारत सरकार के समक्ष उठाएगी, ताकि दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित हो सके और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर को जल्द से जल्द फिर से खोला जा सके।