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किसानों का छाता शुगर मिल आंदोलन: पुलिस कार्रवाई से बढ़ा आक्रोश

मथुरा में छाता शुगर मिल को पुनः चालू करने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। पुलिस द्वारा धरना स्थल से किसानों को हटाने की कार्रवाई ने ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है। इसके बाद, क्षेत्र के 30 गांवों में पंचायतें आयोजित की गईं और बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से मिल की ओर बढ़ने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया है। जानें इस आंदोलन की पूरी कहानी और किसानों की मांगों के बारे में।
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किसानों का आंदोलन गरमाया


मथुरा: छाता की बंद पड़ी शुगर मिल को पुनः चालू करने की मांग को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन सोमवार को अचानक तेज हो गया। लगभग 40 दिनों से मिल परिसर के बाहर धरना दे रहे किसानों को तड़के पुलिस द्वारा हटाने की खबर से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद क्षेत्र के करीब 30 गांवों में पंचायतें आयोजित की गईं और बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से छाता शुगर मिल की ओर बढ़ने लगे। किसानों की बढ़ती भीड़ ने पुलिस-प्रशासन की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया।


पुलिस की कार्रवाई पर आरोप

किसानों का कहना है कि सोमवार तड़के लगभग तीन बजे पुलिस धरना स्थल पर पहुंची, जबकि अधिकांश किसान सो रहे थे। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें वहां से हटाया और धरने के लिए लगाए गए टेंट, माइक और अन्य सामान को भी हटा दिया। इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों में चर्चा शुरू हो गई और ग्रामीणों ने पंचायतें आयोजित कर किसानों से अधिक से अधिक संख्या में मिल परिसर के पास पहुंचने का आह्वान किया।


नेतृत्व का वीडियो और नाराजगी

धरने का नेतृत्व कर रहे सेवानिवृत्त सूबेदार कर्मयोगी ने एक वीडियो जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कुछ लोगों की गिरफ्तारी का भी आरोप लगाया और कहा कि धरना स्थल पर मौजूद सामान को इधर-उधर फेंक दिया गया। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। किसानों के बीच नाराजगी बढ़ती गई और सोशल मीडिया के माध्यम से एकजुट होने की अपीलें की जाने लगीं।


किसानों की भीड़ और नारेबाजी

दोपहर तक छाता और आसपास के गांवों से किसानों का मिल की ओर पहुंचना जारी रहा। कई किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर आए और मिल परिसर के आसपास एकत्र होकर नारेबाजी करने लगे। पंचायतों में आंदोलन को आगे बढ़ाने और शुगर मिल को फिर से चालू करने की रणनीति पर चर्चा की गई। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो में ग्रामीण स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दिखाई दिए।


सुरक्षा व्यवस्था कड़ी और तनाव

स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया है। आसपास के गांवों में एलआईयू की टीमों को सक्रिय किया गया है, जबकि पुलिस बल को भी तैनात किया गया है। वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता किसानों की भीड़ को नियंत्रित करना और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है। दूसरी ओर, किसान बंद पड़ी शुगर मिल को फिर से चालू कराने की मांग पर आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रहे हैं। देर शाम तक इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।