कोटा में चंद्रेसल मठ के महंत की हत्या: पुलिस ने सुलझाई गुत्थी
कोटा में महंत की हत्या का मामला
राजस्थान: कोटा जिले के ऐतिहासिक चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या की जांच में कोटा शहर पुलिस ने तेजी दिखाई है। विशेष जांच दल ने महज छह दिन में इस मामले का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने हत्या की साजिश रचने वाले मुख्य आरोपी और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह हत्या मठ की करोड़ों रुपये की संपत्ति और ट्रस्ट के नियंत्रण को लेकर विवाद के कारण हुई थी।
आधी रात का हमला
यह घटना 5 जून की रात को चंद्रेसल मठ परिसर में हुई। उस समय महंत देवानंद महाराज और संत नंदनवन अपनी कुटिया में सो रहे थे। हमलावर दीवार फांदकर मठ में घुसे और पहले संत नंदनवन के कमरे का दरवाजा बंद कर दिया, ताकि वह मदद के लिए बाहर न आ सकें।
महंत पर चाकुओं से हमला
इसके बाद, हमलावरों ने सोते हुए महंत देवानंद पर चाकुओं से हमला किया। जब महंत अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागे, तो हत्यारों ने उन्हें घेरकर गर्दन और पीठ पर कई वार किए। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। महंत का मूल निवास सवाई माधोपुर के रजवाना गांव में था।
आरोपियों की गिरफ्तारी
संत समाज और स्थानीय लोगों के आक्रोश के बाद, पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और मुखबिरों की सूचना के आधार पर मुख्य आरोपी संतोष राय और पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया है। वारदात में शामिल मुख्य शूटर आदित्य वर्मा और अंकित बैरवा अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।
ट्रस्ट के विवाद में सुपारी
चंद्रेसल मठ के पास लगभग 750 बीघा कीमती भूमि और करोड़ों की संपत्ति है। स्थानीय अधिवक्ता संतोष कुमार राय मठ के संचालन पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते थे, जबकि महंत देवानंद नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे थे। इसी रंजिश के चलते संतोष राय ने महंत को हटाने के लिए आदित्य वर्मा को एक लाख रुपये की सुपारी दी थी। हत्या से पहले आरोपियों ने मठ की रेकी भी की थी।
