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क्या है टेली-मानस? जानें मानसिक स्वास्थ्य के लिए सरकार की नई पहल

टेली-मानस सेवा, जो मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए केंद्र सरकार की एक नई पहल है, अब देशभर में लोगों के लिए उपलब्ध है। यह निःशुल्क और गोपनीय सेवा, मानसिक परेशानियों से जूझ रहे व्यक्तियों को सहायता प्रदान करती है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर, इस सेवा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जानें कैसे यह सेवा लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान में मदद कर रही है और इसके पीछे के आंकड़े क्या कहते हैं।
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नई दिल्ली में टेली-मानस सेवा का आगाज़


नई दिल्ली: जीवन की तेज रफ्तार, रिश्तों में तनाव, भविष्य की चिंताएं, अकेलापन और मन में उठते सवाल—कई बार व्यक्ति बाहरी तौर पर मुस्कुराता है, लेकिन अंदर ही अंदर वह एक कठिन लड़ाई लड़ रहा होता है। ऐसे समय में, देश के लाखों लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है टेली-मानस सेवा। यह केंद्र सरकार की पहल है, जो मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे लोगों को सहायता प्रदान करती है। यह सेवा निःशुल्क, गोपनीय और चौबीसों घंटे उपलब्ध है, जिससे लोग अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं।


विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर टेली-मानस की भूमिका

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और समावेशी बनाने का संकल्प लिया है। मंत्रालय का उद्देश्य है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता हर नागरिक तक पहुंचे, न कि केवल विशेष वर्ग या आर्थिक रूप से सक्षम लोगों तक। इस वर्ष 10 अक्टूबर को मनाए जा रहे इस दिवस पर, टेली-मानस की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह सेवा उन लोगों के लिए सहारा बन रही है, जो सामाजिक झिझक या आर्थिक कठिनाइयों के कारण मदद मांगने से हिचकिचाते हैं।


टेली-मानस सेवा की शुरुआत और उपलब्धियां

टेली-मानस सेवा की शुरुआत 10 अक्टूबर 2022 को हुई थी। तब से अब तक इस हेल्पलाइन पर 47.75 लाख से अधिक कॉल प्राप्त हो चुकी हैं, जो यह दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता कितनी व्यापक है। टेली-मानस की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आसान पहुंच है। लोग टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 पर कॉल करके मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा निःशुल्क और गोपनीय है।


36 राज्यों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता का नेटवर्क

टेली-मानस का नेटवर्क देश के सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैला हुआ है, जहां कुल 53 टेली-मानस प्रकोष्ठ संचालित हैं। ये केंद्र फोन पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं। यह व्यवस्था न केवल तत्काल समस्याओं को सुनने का कार्य करती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं का एक आवश्यक हिस्सा बनाने का भी प्रयास करती है।


महिलाओं की भागीदारी

टेली-मानस से जुड़े आंकड़ों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 44 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि महिलाएं मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्राप्त करने के लिए इस सेवा का उपयोग कर रही हैं। कई महिलाएं सामाजिक दबाव के कारण अपनी समस्याएं साझा नहीं कर पातीं, लेकिन गोपनीय परामर्श उन्हें अपनी बात रखने का एक सुरक्षित माध्यम प्रदान करता है।


मन जागृति पहल

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान में जागरूकता और सामाजिक स्वीकार्यता भी महत्वपूर्ण हैं। 'मन जागृति' पहल के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ बढ़ाने और सामाजिक कलंक को दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। यह पहल समाज में मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने के महत्व को उजागर करती है।


आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सेवाएं

केंद्र सरकार मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास कर रही है। देशभर में 1.83 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत किया गया है। यह प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पहचानने में मदद करेगा।


मानसिक स्वास्थ्य का महत्व

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का संदेश यह है कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर मदद मांगना आवश्यक है। टेली-मानस की उपलब्धता ने लोगों को सहायता प्राप्त करने का एक सरल माध्यम प्रदान किया है।


सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम

केंद्र सरकार का लक्ष्य ऐसी मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें सेवाएं सुलभ हों और जरूरतमंदों को सहायता प्राप्त करने में कोई बाधा न हो। टेली-मानस, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का एकीकरण, और 'मन जागृति' जैसी पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।