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क्या है 'दिमागी नक्सल' का सच? केजरीवाल ने दी जोरदार प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री के 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गर्व से कहा कि वह दिमागी नक्सल हैं क्योंकि वह देशभक्त हैं। केजरीवाल ने यह भी बताया कि जो लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें भी इसी श्रेणी में रखा जाता है। संजय सिंह ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि असली दिमागी नक्सल वे लोग हैं जो हिंसा फैलाते हैं। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और केजरीवाल का क्या कहना है।
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केजरीवाल का बयान: मैं गर्व से दिमागी नक्सल हूं


नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री द्वारा सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को 'दिमागी नक्सल' कहने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुद इस पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हां, मैं दिमागी नक्सल हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं और मुझे इस पर गर्व है। उनके अनुसार, जो लोग इस देश में सवाल उठाते हैं और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखते हैं, उन्हें प्रधानमंत्री दिमागी नक्सल मानते हैं। केजरीवाल ने यह भी कहा कि अगर भगत सिंह और बाबा साहब अंबेडकर आज होते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी यही कहते।


सोशल मीडिया पर केजरीवाल का वीडियो:


सोमवार को एक वीडियो में केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के अनुसार, दिमागी नक्सल वही है जो इस देश में सवाल उठाने की हिम्मत करता है। जो बेहतर सरकारी सेवाओं की मांग करता है और जो एक विकसित भारत का सपना देखता है, वह भी दिमागी नक्सल है।


उन्होंने कहा कि अगर भगत सिंह जीवित होते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी दिमागी नक्सल कहते। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वह गर्व से दिमागी नक्सल हैं क्योंकि वह देशभक्त हैं।


इस बीच, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री युवाओं और जेन-जी के आंदोलनों से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रात में रील बनाने लगते हैं और युवाओं को दिमागी नक्सल कहते हैं।


संजय सिंह ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री उन युवाओं को दिमागी नक्सल कहते हैं जो पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं? क्या छोटे बच्चे जो स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग कर रहे हैं, उन्हें भी यही कहा जा रहा है?


संजय सिंह ने कहा कि असली दिमागी नक्सल वे लोग हैं जो हिंसा फैलाते हैं और जो स्कूलों की बात करने पर मुकदमे दर्ज कराते हैं। असली दिमागी नक्सल तो वह युवा है जो अपने हक की आवाज उठा रहा है।