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गाजियाबाद पुलिस ने साइबर ठगी के गिरोह का किया भंडाफोड़, सात गिरफ्तार

गाजियाबाद पुलिस ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो फर्जी बीमा पॉलिसी और ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से साइबर ठगी कर रहा था। इस कार्रवाई में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कुछ पहले कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। गिरोह ने लोगों को प्रीमियम में छूट का लालच देकर उनके पैसे ठगे। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और वांछित आरोपी की तलाश जारी है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
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गाजियाबाद में साइबर ठगी का खुलासा


गाजियाबाद: गाजियाबाद पुलिस ने फर्जी बीमा पॉलिसी और ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना की संयुक्त कार्रवाई में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण और अपडेट के नाम पर लोगों को प्रीमियम में छूट का लालच देकर उनके पैसे अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कराता था। इसके बाद, फर्जी प्रमाणपत्र बीमा कंपनी के नाम से ई-मेल के जरिए पीड़ितों को भेज दिए जाते थे।


गिरफ्तार आरोपियों से बरामद सामान

पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन, दो एटीएम/डेबिट कार्ड, दो चेकबुक, एक बैंक पासबुक और तीन हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। विभिन्न राज्यों से मिली साइबर अपराध संबंधी शिकायतों में 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों में नीरज भाटी, नीरज सोलंकी, विक्रम सिंह, नितिन, सुशील कुमार, विक्रांत सिंह और राहुल कुमार शामिल हैं। मामले में दीपक कुमार खन्ना उर्फ डीजे की तलाश जारी है।


फर्जी विज्ञापनों का जाल

Google Ads पर डालते थे फर्जी विज्ञापन


जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य टाटा एआईजी इंश्योरेंस के नाम से फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर Google Ads तैयार करते थे। इसके अलावा, फेसबुक पेज के माध्यम से भी लोगों से संपर्क किया जाता था। विज्ञापनों में गिरोह के सदस्यों के मोबाइल नंबर दिए जाते थे। बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण के लिए संपर्क करने वाले लोगों को प्रीमियम पर छूट का लालच दिया जाता था। इसके बाद, पीड़ितों से गिरोह के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे। ठगी की रकम मिलने के बाद, फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर ई-मेल के जरिए भेज दिए जाते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के मोबाइल फोन से फर्जी प्रमाणपत्र, ई-मेल और ऑनलाइन विज्ञापनों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं।


बैंक खातों का कमीशन सिस्टम

कमीशन पर उपलब्ध कराते थे बैंक खाते


पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह साइबर ठगी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निकालता था। विक्रम सिंह उर्फ विक्की दूसरों के बैंक खाते खुलवाकर उनकी जानकारी गिरोह के सरगना दीपक खन्ना को देता था। इसके बदले में उसे खाते में आने वाली रकम का पांच प्रतिशत कमीशन मिलता था। खाता धारकों को भी इसी तरह का कमीशन दिया जाता था। पुलिस अब संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।


आरोपियों का पूर्व अनुभव

कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं आरोपी


गिरफ्तार आरोपियों में नीरज भाटी, नीरज सोलंकी और विक्रांत सिंह पहले दिल्ली के एक कॉल सेंटर में काम कर चुके हैं। पूछताछ में पता चला कि इसी दौरान उन्हें बीमा पॉलिसी के नाम पर धोखाधड़ी करने के तरीके सीखे। बाद में, राहुल के माध्यम से उनका संपर्क दीपक खन्ना से हुआ। पुलिस के अनुसार, दीपक खन्ना और राहुल की मुलाकात डासना जेल में हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद, दोनों ने कथित तौर पर साइबर ठगी का काम शुरू किया। गिरोह पिछले चार महीनों से सक्रिय था।


पुलिस की अपील

डीसीपी मुख्यालय ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की


पुलिस उपायुक्त बलवंत कुमार चौधरी ने बताया कि साइबर अपराधों की रोकथाम और ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रारंभिक जांच में बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण के नाम पर फर्जी ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए ठगी की बात सामने आई है। आम जनता से अपील की गई है कि वे अनजान नंबरों या ऑनलाइन विज्ञापनों पर भरोसा न करें और भुगतान करने से पहले संबंधित बीमा कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें।


वांछित आरोपी की तलाश

कई राज्यों से मिलीं शिकायतें, वांछित आरोपी की तलाश


पुलिस के अनुसार, एनसीआरपी पोर्टल पर केरल, झारखंड समेत अन्य राज्यों से साइबर अपराध संबंधी शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों में ठगी की अनुमानित रकम 40 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। पुलिस दीपक खन्ना की तलाश कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। लोगों से अपील की गई है कि बीमा पॉलिसी के नवीनीकरण या अपडेट के नाम पर मिलने वाले आकर्षक ऑफर की जांच किए बिना किसी खाते में रकम ट्रांसफर न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत संबंधित बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।