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दशहरे पर साइबर ठगी से बचने के लिए जानें ये जरूरी टिप्स

दशहरे के अवसर पर रावण के दहन के साथ-साथ हमें साइबर ठगों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। रामलीला के कलाकारों ने लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने की अपील की है। जानें कैसे आप साइबर ठगों से बच सकते हैं और क्या कदम उठाने चाहिए यदि आप ठगी का शिकार होते हैं। इस दशहरे, अपनी मेहनत की कमाई को साइबर ठगों से बचाने के लिए जरूरी जानकारी प्राप्त करें।
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साइबर ठगों से सावधान रहें


नई दिल्ली: दशहरे के अवसर पर रावण के दहन के साथ-साथ हमें एक और रावण से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। यह रावण कोई पुतला नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में सक्रिय साइबर ठग हैं, जो विभिन्न रूपों में लोगों की मेहनत की कमाई पर नजर रखते हैं। ये ठग कभी बैंक के अधिकारी, कभी पुलिसकर्मी या किसी सरकारी एजेंसी के प्रतिनिधि बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। इसी संदर्भ में रामलीला के कलाकारों ने लोगों से साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने की अपील की है।


साइबर ठगों से बचने के उपाय

रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले अभिनेता शाहबाज खान ने लोगों को चेतावनी दी कि अनजान व्यक्तियों के साथ अपने पासवर्ड (ओटीपी) या अन्य निजी जानकारी साझा न करें। साइबर ठग अक्सर लोगों को डराकर या लालच देकर उनकी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। थोड़ी सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।


उन्होंने यह भी कहा कि किसी अनजान नंबर से आने वाले संदिग्ध कॉल या संदेश पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। अपनी बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और गोपनीय विवरण किसी के साथ साझा करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति खुद को बैंक, पुलिस या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर जानकारी मांगता है, तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें।


डिजिटल अरेस्ट से रहें सतर्क

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने वालों से रहें दूर


रामलीला में हनुमान जी का किरदार निभाने वाले अभिनेता विंदू सिंह ने भी लोगों को साइबर अपराध के एक नए और खतरनाक तरीके, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है, के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति की वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी या फर्जी पहचान-पत्र देखकर घबराएं नहीं।


साइबर ठग कई बार लोगों को यह कहकर डराते हैं कि उनके नाम से कोई आपराधिक मामला दर्ज है या उनके बैंक खाते का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है। इसके बाद गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे वसूले जाते हैं।


विंदू सिंह ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी व्यक्ति केवल वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताकर किसी को कानूनी रूप से गिरफ्तार नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सावधानी बरतें और संबंधित अधिकारियों से स्वतंत्र रूप से संपर्क करें।


साइबर ठगी की शिकायत कैसे करें

साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत


साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो उसे बिना देर किए साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।


विशेषज्ञों की सलाह है कि संदिग्ध कॉल, संदेश, मोबाइल नंबर, भुगतान संबंधी विवरण और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे स्थानांतरित न करें और न ही कोई गोपनीय जानकारी साझा करें।


बुराई के हर रूप को पहचानना जरूरी

बुराई के हर रूप को पहचानना जरूरी


दशहरे का संदेश केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है। बदलते समय में बुराई के नए रूपों को पहचानना और समाज को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। जिस तरह रामायण में मर्यादा विवेक और साहस की विजय हुई, उसी तरह डिजिटल दुनिया में जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर शिकायत करके साइबर ठगी से बचा जा सकता है। संदेश स्पष्ट है—रावण चाहे किसी भी भेष में आए, पहचानिए, सावधान रहिए और अपनी मेहनत की कमाई को साइबर ठगों के हाथों में जाने से बचाइए।