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दिल्ली के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों को पुनर्जीवित करने की मांग: क्या होगी नई नीति?

दिल्ली के सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के बंद होने के बाद, अब इनको पुनर्जीवित करने की मांग उठ रही है। शिक्षाविद् डॉ. दयानंद वत्स ने मुख्यमंत्री से नई नीति बनाने का आग्रह किया है, जिससे आम परिवारों को सस्ते मनोरंजन का अवसर मिल सके। क्या सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी? जानें पूरी कहानी।
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दिल्ली में सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों का संकट


नई दिल्ली: एक समय था जब दिल्ली के मोहल्लों में सिनेमा का पर्दा उठते ही दर्शकों के चेहरे पर खुशी छा जाती थी। टिकट की कीमतें कम होती थीं और मनोरंजन घर के नजदीक उपलब्ध था। हर हफ्ते सिनेमा हॉल के बाहर एक मेले जैसा माहौल होता था। लेकिन समय के साथ मल्टीप्लेक्स संस्कृति का उदय हुआ और देखते ही देखते दिल्ली के सैकड़ों सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर बंद हो गए। अब इन बंद सिनेमाघरों को फिर से सक्रिय करने की मांग उठ रही है।


नई नीति की आवश्यकता


दिल्ली सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर दर्शक मंच के संयोजक और शिक्षाविद् डॉ. दयानंद वत्स ने मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता से अनुरोध किया है कि दिल्ली में बंद पड़े सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों के पुनर्निर्माण और संचालन के लिए एक नई नीति बनाई जाए।


सस्ते मनोरंजन की दिशा में कदम


डॉ. वत्स ने बताया कि सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर आम और गरीब परिवारों के लिए सस्ते मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण साधन रहे हैं। मल्टीप्लेक्स में बढ़ती टिकट दरों के कारण सामान्य परिवारों के लिए फिल्म देखना अब महंगा हो गया है। उन्होंने सरकार से ऐसी नीति बनाने का आग्रह किया है, जिससे लोगों को उनके आस-पास किफायती मनोरंजन उपलब्ध हो सके। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री से मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर 'दिल्ली सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर नीति' लाने की दिशा में त्वरित कदम उठाने का अनुरोध किया है।