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दिल्ली में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की नई व्यवस्था में उलझन: कारोबारियों की चिंता बढ़ी

दिल्ली में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही कई समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। सरकार ने प्रमाणपत्र जारी करने का कार्य निजी ऑडिटरों को सौंपा है, लेकिन कोई भी योग्य ऑडिटर सामने नहीं आया। इसके परिणामस्वरूप, पुरानी व्यवस्था समाप्त हो गई है और नई एनओसी के लिए आवेदन लेना बंद कर दिया गया है। कारोबारियों की चिंताएं बढ़ रही हैं, क्योंकि उन्हें नगर निगम की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। जानें इस स्थिति का क्या समाधान हो सकता है और सरकार का क्या निर्णय होगा।
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दिल्ली में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की नई व्यवस्था में पेच


नई दिल्ली: दिल्ली में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की नई प्रणाली लागू होने से पहले ही एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। सरकार ने अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने और नवीनीकरण का कार्य दिल्ली फायर सर्विस से हटाकर निजी ऑडिटरों को सौंपने का निर्णय लिया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई भी योग्य ऑडिटर सामने नहीं आया। इसके परिणामस्वरूप, पुरानी व्यवस्था के तहत फायर सर्विस की प्रमाणपत्र जारी करने की शक्ति 24 अगस्त को समाप्त हो गई, जिसके बाद नए फायर एनओसी के लिए आवेदन लेना बंद कर दिया गया है।


42 इमारतों को मिला डीम्ड दर्जा

फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 1 अगस्त से 7 सितंबर 2026 के बीच कुल 42 इमारतों को डीम्ड दर्जा दिया गया है। इनमें 13 वाणिज्यिक, 25 औद्योगिक, एक शैक्षणिक संस्थान और एक आवासीय भवन शामिल हैं। हालांकि, 'डीम्ड' व्यवस्था के बावजूद नई एनओसी जारी करने की स्थिति को लेकर कई कारोबारियों में असमंजस बना हुआ है।


नियमों में बदलाव

दिल्ली में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में बदलाव 26 मई 2026 को किया गया। इस बदलाव के तहत, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया अब तीसरे पक्ष के ऑडिटरों के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए योग्य निजी ऑडिटरों को दिल्ली फायर सर्विस के साथ सूचीबद्ध किया जाना था। विभाग ने संभावित आवेदकों को प्रक्रिया समझाने और प्रशिक्षण देने के लिए कदम उठाए थे।


आवेदन की स्थिति

नई व्यवस्था के लिए 25 से 27 आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन 17 अगस्त को हुई जांच में कोई भी आवेदन पूरी तरह योग्य नहीं पाया गया। इसका मतलब यह है कि 24 अगस्त को पुरानी व्यवस्था समाप्त होने तक विभाग के पास कोई भी निजी ऑडिटर नहीं था, जिसे नई प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जा सके।


सरकार को भेजी गई फाइल

फायर विभाग ने 17 अगस्त को स्थिति स्पष्ट होने के बाद सरकार को फाइल भेजी, जिसमें तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया। इस समय में निजी ऑडिटर की व्यवस्था तैयार होने तक दिल्ली फायर सर्विस को अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति मांगी गई। हालांकि, इस फाइल पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।


नई अर्जियां बंद

24 अगस्त के बाद, दिल्ली फायर सर्विस ने नई फायर एनओसी के लिए आवेदन स्वीकार करना बंद कर दिया है। विभाग का कहना है कि 24 अगस्त तक प्राप्त आवेदनों पर प्रक्रिया जारी है, लेकिन उसके बाद नई अर्जियों को लेने की स्थिति फिलहाल नहीं है। पहले रोजाना 30 से 40 आवेदन आते थे, जिनमें नई एनओसी और पुराने प्रमाणपत्रों के नवीनीकरण के आवेदन शामिल होते थे।


व्यापारियों की चिंताएं

इस नई व्यवस्था का असर कारोबारियों पर भी पड़ने लगा है। कुछ रेस्टोरेंट और गेस्ट हाउस संचालकों ने शिकायत की है कि फायर प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर उन्हें नगर निगम की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। कुछ ने कारोबार बंद होने या इमारत सील किए जाने की बात भी विभाग के सामने रखी है।


पूर्व महानिदेशक की राय

दिल्ली फायर सर्विस के पूर्व महानिदेशक अतुल गर्ग का कहना है कि तीसरे पक्ष के माध्यम से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन आवेदकों ने आवेदन किया था, उन्हें कमियों की जानकारी देकर उन्हें पूरा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।


अंतरिम समाधान की आवश्यकता

पूर्व महानिदेशक ने कहा कि यदि सरकार विस्तार की अनुमति देती है, तब भी नई व्यवस्था तुरंत लागू नहीं हो सकती। ऐसे में लंबित मामलों के लिए अस्थायी स्व-प्रमाणन जैसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। इसके तहत कारोबारी अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन का स्व-प्रमाणन देकर अस्थायी राहत पा सकते हैं।


सरकार के फैसले का इंतजार

फिलहाल, दिल्ली फायर सर्विस की तीन महीने की अतिरिक्त समयसीमा की मांग वाली फाइल सरकार के पास लंबित है। विभाग का कहना है कि अनुमति मिलते ही वह अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करने और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। नई व्यवस्था के तहत निजी ऑडिटर तैयार होने में समय लगना तय है। ऐसे में, सबसे बड़ा सवाल उन कारोबारियों और संस्थानों का है, जिन्हें फायर प्रमाणपत्र की आवश्यकता है।