दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा पर प्रशासन का सख्त एक्शन: सत्य निकेतन हादसे के बाद की गई कार्रवाई
नई दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सक्रियता
नई दिल्ली: सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के बाद, दिल्ली प्रशासन ने भवन सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राजधानी में खतरनाक और जर्जर इमारतों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके साथ ही, छात्र-छात्राओं के लिए रहने वाले पेइंग गेस्ट आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच की जा रही है। दिल्ली नगर निगम ने 24 घंटे के भीतर विभिन्न क्षेत्रों में 1252 पीजी का सर्वेक्षण किया, जिसमें 39 को माइनर खतरे के रूप में चिन्हित किया गया।
शाहदरा साउथ जोन में सर्वे की प्रगति
बुधवार की सुबह, पूर्वी दिल्ली में निगम की टीमें सक्रिय हुईं। निगम अभियंता लक्ष्य वर्मा की देखरेख में पूर्वी दिल्ली और शाहदरा क्षेत्र में एक साथ दो मोर्चों पर कार्रवाई की गई। गीता कॉलोनी में जर्जर इमारतों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई, जबकि लक्ष्मी नगर के जे-ब्लॉक में पीजी आवासों की जांच की गई।
अग्नि सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं
1253 पीजी की पड़ताल, अग्नि सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता
लक्ष्मी नगर के जे-ब्लॉक में जेई पंकज ने 21 पीजी का सर्वेक्षण किया। जांच के दौरान, कई स्थानों पर अग्निशामक विभाग के अनापत्ति प्रमाण-पत्र में कमी पाई गई। एक इमारत में आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं थे, जिससे वहां रहने वालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे।
छात्रों की समस्याएं और किराया
15 से 30 हजार रुपये किराया, सुविधाओं के नाम पर सवाल
पीजी में रहने वाले छात्रों ने निगम की टीम के सामने अपनी समस्याएं रखीं। छात्रों का कहना है कि कई पीजी में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है और खाने की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्रों ने बताया कि एक बिस्तर के लिए 15 हजार रुपये तक मासिक किराया लिया जाता है, और सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्हें मजबूरी में पीजी में रहना पड़ता है।
गीता कॉलोनी में निगम की कार्रवाई
गीता कॉलोनी में जर्जर इमारत पर चला निगम का हथौड़ा
गीता कॉलोनी में खतरनाक घोषित मकान के खिलाफ निगम की कार्रवाई शुरू हुई। इस दौरान कृष्णा नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. अनिल गोयल मौके पर मौजूद रहे। विधायक ने बताया कि मकान संख्या 2ए/41 को खतरनाक घोषित किया गया था, जिससे स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को खतरा था।
अधिकारियों को दी गई सूचना
तीन बार अधिकारियों को दी गई सूचना
विधायक डॉ. अनिल गोयल ने मुख्यमंत्री और निगम के अधिकारियों को पत्र भेजकर जर्जर इमारत के संबंध में सूचित किया था। उन्होंने जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इमारत को ध्वस्त करने का आग्रह किया था।
सुरक्षा पर प्रशासन का ध्यान
हादसे के बाद सुरक्षा पर सरकार का जोर
सत्य निकेतन हादसे के बाद, दिल्ली में चल रही कार्रवाई को व्यापक सुरक्षा अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासन अब संभावित खतरों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
