दिल्ली में रामलीला रैली पर व्यापारियों का विरोध: क्या राजनीति से प्रभावित होगा कारोबार?
राजधानी में सियासी हलचल
नई दिल्ली: दिल्ली में रामलीला मार्च और रैली को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने रैली में शामिल होने वाले लोगों से स्थानीय दुकानों पर खरीदारी करने की अपील की है, जिस पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कैट के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि दिल्ली के व्यापारियों को राजनीतिक रैलियों में भीड़ की नहीं, बल्कि त्योहारों के दौरान ग्राहकों की आवश्यकता है।
व्यापारियों की रोजी-रोटी का सवाल
खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारियों की आजीविका को राजनीतिक प्रयोगशाला नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाजारों में पहुंच बाधित करने और फिर रैली में आने वालों से खरीदारी की अपील करना समस्याओं का समाधान नहीं है। व्यापार का संचालन नियमित ग्राहकों, परिवहन, माल की आपूर्ति और पार्किंग जैसी सुविधाओं पर निर्भर करता है।
रैली का कारोबार पर संभावित प्रभाव
उन्होंने चेतावनी दी कि दीपावली, छठ और भाई दूज जैसे त्योहारों के दौरान लाखों ग्राहक दिल्ली के बाजारों में आते हैं, जो व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण समय होता है। रैली के कारण होने वाले जाम और यातायात बाधित होने से छोटे दुकानदारों और परिवहन से जुड़े लोगों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कैट का सुझाव: रैली बाहरी दिल्ली में आयोजित हो
कैट ने शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन करते हुए सुझाव दिया है कि रैली के लिए दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में स्थान चुना जाए, ताकि बाजार और आम जनजीवन प्रभावित न हों। खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारियों को भाषणों की नहीं, बल्कि सुरक्षित कारोबार की आवश्यकता है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन लाखों परिवारों की रोजी-रोटी सबसे महत्वपूर्ण है।
