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दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का 'छात्र सुरक्षा मार्च': सत्य निकेतन हादसे के खिलाफ उठी आवाज़

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने सत्य निकेतन हादसे के विरोध में 'छात्र सुरक्षा मार्च' का आयोजन किया। इस मार्च में हजारों छात्रों ने सुरक्षित आवास और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की। अभाविप ने हॉस्टल की कमी और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाई। नेताओं ने प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। जानें इस प्रदर्शन के पीछे की पूरी कहानी और छात्रों की प्रमुख मांगें।
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छात्रों का प्रदर्शन


नई दिल्ली: सत्य निकेतन में हुए हादसे के खिलाफ मंगलवार को हजारों छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय में 'छात्र सुरक्षा मार्च' का आयोजन किया। यह मार्च रग्बी मैदान से शुरू होकर आर्ट्स फैकल्टी तक पहुंचा, जहां छात्रों ने प्रशासन से सुरक्षा के मुद्दों पर सवाल उठाए। विभिन्न महाविद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने सुरक्षित आवास और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की। छात्रों के नारों में सत्य निकेतन हादसे का दुख और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का संकल्प स्पष्ट था। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय और उसके आसपास के छात्र-बहुल क्षेत्रों में सभी पीजी का सुरक्षा और संरचनात्मक ऑडिट कराने की मांग की।


अभाविप की प्रमुख मांगें

अभाविप ने बताया कि हॉस्टल की कमी के कारण कई छात्रों को मजबूरन पीजी और किराए के मकानों में रहना पड़ता है। संगठन ने दिल्ली विश्वविद्यालय में नए छात्रावासों के निर्माण, मौजूदा हॉस्टलों की क्षमता बढ़ाने और छात्रों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही, सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले पीजी संचालकों और भवन मालिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी मांग की गई।


नेताओं के बयान

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि सत्य निकेतन की घटना को केवल एक हादसा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने एमसीडी प्रशासन की जवाबदेही तय करने और आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि छात्रों के मन में एक ही सवाल है, 'आखिर कब तक?' वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष आर्यन मान ने कहा कि सुरक्षित छात्रावासों की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है और इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।