दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: लिव-इन रिलेशनशिप को माना शादी के समान
दिल्ली उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने वयस्क नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों और स्वतंत्रता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने कहा है कि जो बालिग जोड़े आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं, उनका संबंध विवाह के समान है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के तहत दो बालिगों को अपने पसंद के साथी के साथ रहने का पूरा अधिकार है, जिसमें उनके परिवार या समाज का कोई भी व्यक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
दखल देने का अधिकार नहीं
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने यह आदेश 13 अगस्त को एक प्रेमी जोड़े की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस जोड़े को लड़की के परिवार से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। अदालत ने दिल्ली पुलिस को तुरंत सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ने कहा कि समाज के नैतिक दबाव के नाम पर किसी के मौलिक अधिकारों का हनन करना उसकी व्यक्तिगत पहचान और स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा निर्णय
उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि भले ही लिव-इन में रह रहे जोड़े कानूनी रूप से शादीशुदा न हों, लेकिन बालिग होने के नाते उनका एक साथ रहना विवाह के समान माना जाएगा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना औपचारिक विवाह के भी बालिगों को एक साथ रहने का अधिकार है। यह अधिकार न केवल सर्वोच्च अदालत द्वारा मान्यता प्राप्त है, बल्कि भारतीय विधायिका ने भी इसे 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' जैसे कानूनों के तहत कानूनी सुरक्षा दी है।
पुलिस की लापरवाही पर सख्त संदेश
याचिकाकर्ता जोड़े ने अदालत में अपनी समस्या बताते हुए कहा कि वे एक-दूसरे के साथ रह रहे हैं और जल्द ही शादी करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, लड़की के पिता और भाई इस रिश्ते के खिलाफ हैं और लगातार हिंसक परिणाम भुगतने की धमकियां दे रहे हैं। पीड़ित जोड़े ने स्थानीय थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके बाद उन्हें सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अदालत के इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि जब बात दो बालिगों की सुरक्षा की हो, तो पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
