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पंजाब पुलिस की सड़क सुरक्षा पहल: एसएसएफ ने बचाई हजारों जानें

पंजाब पुलिस की सड़क सुरक्षा बल (एसएसएफ) ने सड़क दुर्घटनाओं में जान बचाने के लिए एक नई पहल शुरू की है। यह बल ड्रोन और एआई तकनीक का उपयोग कर रहा है, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार हो रहा है। पिछले दो वर्षों में, एसएसएफ ने हजारों लोगों की जान बचाई है और सड़क दुर्घटनाओं में मौतों में 45-48 प्रतिशत की कमी आई है। जानें इस बल की विशेषताएँ और इसके प्रभाव के बारे में।
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चंडीगढ़ में सड़क सुरक्षा का नया मानक


चंडीगढ़: पंजाब पुलिस न केवल अपराधियों से सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि अपनी प्रमुख परियोजना 'सड़क सुरक्षा बल' (एसएसएफ) के माध्यम से सड़क सुरक्षा में भी नए मानक स्थापित कर रही है। यह बल यात्रियों की सुरक्षा के लिए समर्पित है और इसमें ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-आधारित पूर्वानुमान प्रणालियों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पंजाब पुलिस को भारत का पहला 3डी पुलिस बल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने में मदद मिल रही है।


एसएसएफ की तैनाती का प्रभाव

एसएसएफ का प्रभाव उन सड़कों पर स्पष्ट है, जहाँ इसे तैनात किया गया है। फरवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच, इस बल ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में 47,386 लोगों की मदद की। इनमें से 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया, जिससे कई जानें बचाई गईं।


पारंपरिक पुलिस से अलग एसएसएफ का कार्य

पंजाब एसएसएफ का मुख्य ध्यान हाईवे और प्रमुख सड़कों पर पेट्रोलिंग पर है। पारंपरिक पुलिस के विपरीत, एसएसएफ के जवानों को कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर नहीं लगाया जाता। उनका मुख्य कार्य सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करना है।


एसएसएफ की संसाधन क्षमता

इस बल में 144 हाई-टेक वाहन और 1,600 से अधिक प्रशिक्षित कर्मी हैं, जिनमें लगभग 28 प्रतिशत महिलाएँ हैं। ये टीमें महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर 4,100 किलोमीटर क्षेत्र में तैनात हैं और औसतन 6 से 10 मिनट में दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया देती हैं।


प्लैटिनम 10 मिनट सिद्धांत

'प्लैटिनम 10 मिनट' सिद्धांत के तहत, एसएसएफ का लक्ष्य दुर्घटना पीड़ितों तक 6 से 8 मिनट में पहुँचकर उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करना है। एसएसएफ के वाहनों में स्पीड गन, एल्कोमीटर, ई-चालान मशीनें और प्राथमिक उपचार किट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।


डीजीपी का बयान

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि एसएसएफ की निगरानी वाले मार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं में मौतों में 45-48 प्रतिशत की कमी आई है। 2023 में 1,955 मौतें घटकर 2024 में 1,016 रह गईं, जिससे लगभग 940 लोगों की जान बचाई गई।


एसएसएफ का अतिरिक्त योगदान

सड़क सुरक्षा के अलावा, एसएसएफ ने पुलिस कार्रवाई में भी योगदान दिया है। टीमों ने 6 किलोग्राम अफीम और चोरी के वाहन बरामद किए हैं, और आत्महत्याओं को रोकने में भी मदद की है।


फेज़-II में विस्तार

फेज़-II के तहत, एसएसएफ का कवरेज 5,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर किया जाएगा। इसका उद्देश्य सैटेलाइट डेटा और एआई का उपयोग करके एक समग्र सड़क सुरक्षा तंत्र विकसित करना है।


3डी पुलिसिंग मॉडल

3डी पुलिसिंग मॉडल में ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-आधारित पूर्वानुमान प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पुलिस की प्रतिक्रिया और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकेगा।


डीजीपी का 'विजन एसएसएफ-2047'

डीजीपी ने कहा कि 'विजन एसएसएफ-2047' का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम स्तर पर लाना और हरित मोबिलिटी कॉरिडोर विकसित करना है।


पंजाब को रोड सेफ्टी हब बनाना

डीजीपी ने कहा कि इस परियोजना का लक्ष्य पंजाब को भारत का रोड सेफ्टी हब बनाना है। एसएसएफ पहले ही भारत का हाईवे सुरक्षा के लिए समर्पित पहला बल बन चुका है।


स्वयं के सैटेलाइट की संभावना

पंजाब सरकार ने हाईवे सुरक्षा के लिए भारत का पहला विशेष बल स्थापित किया है और सड़क सुरक्षा के तरीकों को बदलने की दिशा में काम कर रही है।


आईटीएमएस: तकनीकी आधार

एसएसएफ परियोजना इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) पर आधारित है, जो एआई और रियल-टाइम एनालिटिक्स का उपयोग करती है।


एएनपीआर और 7E फ्रेमवर्क

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स के माध्यम से पुलिस ने दुर्घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने का औसत समय सात मिनट से कम कर दिया है।


पीआरएसटीआरसी: अनुसंधान और सहयोग

पीआरएसटीआरसी अनुसंधान और प्रशिक्षण का नेतृत्व करता है, जिसमें प्रमुख शिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग किया जा रहा है।


अन्य राज्यों से तुलना

अन्य राज्यों की तुलना में, एसएसएफ की संरचना और कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण अंतर है।


एसडीजीपी का बयान

एसडीजीपी अमरदीप सिंह राय ने कहा कि एसएसएफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों की जान बचाना है।


एसएसएफ कर्मियों की ड्यूटी

एसएसएफ कर्मियों को वीआईपी ड्यूटी के लिए नहीं लगाया जाता और उनका मुख्य कार्य सड़क सुरक्षा है।