पंजाब में पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र के नियमों में बदलाव
पंजाब में नए नियमों की घोषणा
पंजाब समाचार: पंजाब में पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। अब यह प्रमाण पत्र केवल आय के आधार पर नहीं बनेगा, बल्कि माता-पिता की सरकारी नौकरी, पद, सामाजिक स्थिति, पिछले तीन वर्षों की आय और परिवार की संपत्ति जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
समस्याओं का समाधान जल्द
पंजाब भवन में बुधवार को सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति और कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को दी गई जानकारी
उन्होंने बताया कि सेवा केंद्रों और पटवारियों को पात्रता संबंधी सभी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। जल्द ही सभी सेवा केंद्रों के बाहर सूचना पट लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को यह स्पष्ट हो सके कि किन परिस्थितियों में पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र बनाया जा सकता है।
क्रीमी लेयर का दायरा बढ़ा
कौर ने बताया कि संवैधानिक पदों पर रह चुके व्यक्तियों, उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों और निश्चित आय से अधिक वाले परिवारों के बच्चों को प्रमाण पत्र का लाभ नहीं मिलेगा। बड़े सरकारी अधिकारियों के बच्चों के साथ-साथ चिकित्सक, अभियंता और अन्य पेशेवर पदों पर कार्यरत माता-पिता के बच्चों की पात्रता भी निर्धारित नियमों के अनुसार तय की जाएगी।
आय सीमा और संपत्ति की स्थिति
आठ लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को क्रीमी लेयर में माना जाएगा। प्रमाण पत्र के लिए परिवार की शहरी और ग्रामीण संपत्ति की स्थिति भी देखी जाएगी। यदि किसी लड़की की शादी हो जाती है, तो उसका पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र उसके विवाह के बाद के परिवार की स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके माता-पिता की सामाजिक स्थिति को देखते हुए बनेगा।
लाभार्थियों की संख्या
कौर ने बताया कि वर्ष 2022 के बाद आशीर्वाद योजना के तहत लगभग 76 हजार लाभार्थियों को लाभ दिया गया है और सरकार ने करीब 391 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।
पंजाबी विश्वविद्यालय में दाखिला
पंजाबी विश्वविद्यालय में पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जल्द ही दो छात्रावास शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के 12 प्रमुख व्यावसायिक महाविद्यालयों में प्रमाण पत्र के आधार पर 210 सीटों पर दाखिला दिया जा रहा है।
