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पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य का इलाज: मुख्यमंत्री सेहत योजना से बढ़ी जागरूकता

पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज ने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह ने बताया कि इस योजना के माध्यम से लोग सिज़ोफ्रेनिया, डिप्रेशन और अन्य मानसिक बीमारियों का समय पर इलाज करवा रहे हैं। जागरूकता में वृद्धि और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बना रही हैं। जानें इस योजना के तहत और क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं और कैसे यह समाज में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही है।
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पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य का इलाज: मुख्यमंत्री सेहत योजना से बढ़ी जागरूकता

मुख्यमंत्री सेहत योजना का प्रभाव


चंडीगढ़: पंजाब में 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के तहत कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज के चलते मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों का इलाज कराने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने इस योजना के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह आर्थिक बाधाओं को कम करने और लोगों को समय पर उपचार के लिए प्रेरित करने के लिए बनाई गई है।


मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत सिज़ोफ्रेनिया, डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, एंग्जाइटी डिसऑर्डर, तनाव और नशाखोरी जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों का इलाज शामिल है। उन्होंने कहा, "सरकारी अस्पतालों में इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी) और ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ भी इस पैकेज में शामिल हैं।"


भारत में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति

भारत में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (निमहांस, 2016) के अनुसार, लगभग 15 से 20 करोड़ लोग डिप्रेशन, एंग्जाइटी और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हैं।


हालांकि, समाज में नकारात्मक दृष्टिकोण, जागरूकता की कमी और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी के कारण कई लोग समय पर इलाज नहीं करवा पाते।


समाज में मानसिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता

डा. बलबीर सिंह ने कहा, "मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। डिप्रेशन, सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और एंग्जाइटी जैसी बीमारियों का प्रभावी इलाज संभव है, इसलिए लोगों को विशेषज्ञ सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।"


उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित लक्षणों का अनुभव करने वाले लोगों से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में समय पर इलाज करवाने की अपील की।


योग और मानसिक स्वास्थ्य

डा. सिंह ने बताया कि 'सीएम दी योगशाला' के माध्यम से योग को मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के लिए एक प्रभावी साधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।


राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 457 लाभार्थियों ने सरकारी अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य पैकेज के तहत इलाज करवाया है, जिसमें लगभग 55 लाख रुपये के दावों का निपटारा किया गया है।


जागरूकता में वृद्धि

सिविल अस्पताल, बरनाला के सलाहकार मनोचिकित्सक डा. गगनदीप सेखों ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "लोग अब समझने लगे हैं कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ भी अन्य शारीरिक बीमारियों की तरह हैं।"


उन्होंने बताया कि शैक्षणिक दबाव, रोजगार की अनिश्चितता और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण हैं।


मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना का महत्व

डा. गगनदीप सेखों ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत कैशलेस इलाज ने अधिक लोगों को अस्पतालों में परामर्श और इलाज के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा, "समय पर हस्तक्षेप बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने और जटिलताओं को रोकने के लिए आवश्यक है।"