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पंजाब में शिक्षा में क्रांति: हरजोत सिंह बैंस ने की ऐतिहासिक उपलब्धियों की घोषणा

पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलावों की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि पंजाब ने नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026 में शीर्ष स्थान हासिल किया है। इसके साथ ही, सरकारी स्कूलों के छात्रों ने नीट परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। मंत्री ने शिक्षा में सुधार के लिए उठाए गए कदमों और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। जानें इस शिक्षा क्रांति के बारे में और क्या-क्या बदलाव आए हैं।
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पंजाब ने शिक्षा में नया मुकाम हासिल किया


नई दिल्ली: पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए कहा कि पंजाब ने 'नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026' में केरल को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख छात्र चटाइयों पर पढ़ने को मजबूर थे। अब, पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 छात्रों ने नीट परीक्षा पास की है, और यह राज्य पहली से 12वीं कक्षा तक 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह बदलाव पंजाब सरकार के वादे का परिणाम है।


हरजोत सिंह बैंस का महत्वपूर्ण बयान

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए, मंत्री बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार ग्रहण करते समय स्कूलों की दयनीय स्थिति का उल्लेख किया।


उन्होंने बताया कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में बाथरूम की स्थिति खराब थी, और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।


उन्होंने चुनौती दी कि किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि की जा सकती है, और कहा, 'अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।'


शिक्षा में सुधार के लिए उठाए गए कदम

स. बैंस ने बताया कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।


उन्होंने कहा कि सरकार का 'मिशन समरथ' भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक बन गया है। इस कार्यक्रम के तहत, विद्यार्थियों को उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।


उन्होंने कहा, 'जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। अब हम इन विद्यार्थियों को तीसरी कक्षा के स्तर से पढ़ा रहे हैं और उनके प्रदर्शन में सुधार हो रहा है।'


नीट परीक्षा में सफलता की कहानी

स. बैंस ने बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या 2021 में 80 से बढ़कर 2026 में 882 हो गई है। यह 'पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस' (पेस) पहल का परिणाम है।


उन्होंने कहा, 'पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं।' उन्होंने हरनूरप्रीत कौर का उदाहरण दिया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की।


विपक्ष पर निशाना और सरकारी स्कूलों की स्थिति

स. बैंस ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, 'अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं, लेकिन सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हैं?'


उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में दाखिला दर में गिरावट केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कोविड के बाद देशभर में देखा गया है।


भविष्य की योजनाएं और बुनियादी ढांचे में सुधार

स. बैंस ने बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी भी मिली है।


उन्होंने कहा, 'भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को पहली पसंद बना रही है। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।'