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पंजाब सरकार का नया कानून: बेअदबी के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी

पंजाब सरकार ने बेअदबी के खिलाफ एक नया कानून पेश किया है, जिसका उद्देश्य जानबूझकर बेअदबी करने वालों को सख्त सजा दिलाना है। आम आदमी पार्टी के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने इस कानून के पीछे के कारणों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि यह कानून सिख धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा और सिख संगत के सुझावों को भी शामिल किया गया है। जानें इस कानून के बारे में और क्या है इसके प्रभाव और प्रक्रिया।
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चंडीगढ़ में मालविंदर सिंह कंग का बयान


चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार का नया बेअदबी विरोधी कानून केवल उन व्यक्तियों के लिए है जो जानबूझकर बेअदबी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य सिख धार्मिक मामलों, सिख रहत मर्यादा या धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों में हस्तक्षेप करना नहीं है।


कानून का उद्देश्य और प्रक्रिया

गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कंग ने बताया कि भगवंत मान सरकार ने यह कानून सिख समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग के जवाब में पेश किया है। इसका उद्देश्य बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है, ताकि दोषियों को सजा से बचने का मौका न मिले।


उन्होंने बताया कि पंजाब विधानसभा द्वारा बिल को सर्वसम्मति से पास करने के बाद, श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कुछ सुझाव दिए थे। पंजाब सरकार ने उन सुझावों का सम्मान करते हुए ड्राफ्ट में संशोधन किए हैं, जो आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाएंगे।


सिख धार्मिक संस्थाओं का सम्मान

कंग ने कहा कि आप सरकार श्री अकाल तख्त साहिब और सभी सिख धार्मिक संस्थाओं का बहुत सम्मान करती है। उनका उद्देश्य कभी भी सिख धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं रहा है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो कोई भी जानबूझकर बेअदबी करता है, उसे कानून के तहत पूरी सजा मिले।


उन्होंने कहा कि बिल में इस्तेमाल किए गए शब्दों के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, सरकार सिख परंपराओं के अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए सम्मानजनक शब्दों को स्पष्ट रूप से शामिल करने के लिए संशोधन करेगी।


कस्टोडियन की परिभाषा

कंग ने 'कस्टोडियन' की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका अर्थ मालिकाना हक नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति से है जिसे पवित्र स्वरूपों की सेवा और सुरक्षा सौंपी गई है। इसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के रखरखाव के लिए जिम्मेदार कोई भी व्यक्ति या गुरुद्वारा कमेटी शामिल है।


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी बुरी घटना के लिए कस्टोडियन या सेवादार को दोषी नहीं ठहराया जाएगा, यदि घटना अनजाने में हुई गलती या तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुई हो।


शिकायतों की प्रक्रिया

कंग ने कहा कि किसी भी केयरटेकर को शिकायत मिलने पर तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। हर शिकायत की स्वतंत्र जांच की जाएगी, और जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि जानबूझकर गलती हुई है, तब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।


उन्होंने बताया कि यह एक्ट विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है जो जानबूझकर बेअदबी करते हैं या ऐसा करने की साजिश रचते हैं।


गलतफहमियों का खंडन

कंग ने कहा कि इस एक्ट का धार्मिक, शैक्षिक, या डिजिटल प्रचार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कथा, कीर्तन, रिसर्च, और अन्य धार्मिक गतिविधियाँ इस कानून के दायरे से बाहर हैं।


उन्होंने यह भी बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के हर स्वरूप के लिए एक यूनिक एन्क्रिप्टेड आइडेंटिफिकेशन नंबर केवल एसजीपीसी द्वारा जारी किया जाएगा।


केंद्र सरकार से अपील

कंग ने कहा कि पंजाब सरकार केंद्र सरकार से अपील करेगी कि पूरे देश में एक समान कानून बनाया जाए ताकि बेअदबी की घटनाओं से निपटने में एकरूपता बनी रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून सिख संगत या धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य केवल उन लोगों को सजा देना है जो जानबूझकर बेअदबी करते हैं।