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पंजाब सरकार की मनरेगा कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण की मांग: केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

पंजाब के ग्रामीण विकास मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर मनरेगा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग की है। उन्होंने केंद्र सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। पंजाब सरकार ने 2100 से अधिक कर्मचारियों के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया है, जो पिछले 18 वर्षों से इस योजना के तहत कार्यरत हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और कर्मचारियों की क्या मांगें हैं।
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पंजाब में मनरेगा कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आवाज उठाई गई


चंडीगढ़: पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर हाल ही में शुरू की गई वीबी-जी राम जी योजना के तहत मनरेगा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की। उन्होंने देशभर में कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नीति बनाने की अपील की।


मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार पंजाब के 2100 से अधिक मनरेगा कर्मचारियों के साथ खड़ी है। उन्होंने केंद्र सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए लंबित वेतन को तुरंत जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले 18 वर्षों से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में लगे कर्मचारियों की मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


केंद्र सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा, "यह एक संवेदनशील मुद्दा है। कांग्रेस और अकाली दल जैसे विपक्षी दल इस मुद्दे को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि पंजाब सरकार पर दोष मढ़ा जा सके। इसलिए सच्चाई को जनता के सामने लाना आवश्यक है।"


उन्होंने बताया कि मनरेगा योजना 2005 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य हर परिवार को रोजगार उपलब्ध कराना था। पंजाब में यह योजना लगभग 18 वर्षों से लागू है और इसके माध्यम से ग्रामीण लोगों को रोजगार मिल रहा है।


कर्मचारियों की सेवाएं और उनकी मांगें

मंत्री ने बताया कि इस योजना के संचालन के लिए लगभग 2000 से 2100 कर्मचारी, जिनमें तकनीकी सहायक, ग्राम रोजगार सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल हैं, पिछले 18 वर्षों से कार्यरत हैं।


सौंद ने कहा, "इन कर्मचारियों की मेहनत को एक झटके में समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार के अधिनियम के तहत कार्य किया है।"


उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों का वेतन पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था, लेकिन अब केंद्र ने योजना बंद कर दी है, जिससे लगभग 2100 कर्मचारियों को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।


नई योजना पर कर्मचारियों की आपत्ति

मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे नई योजना के तहत काम नहीं करना चाहते, क्योंकि उन्हें नियमितीकरण का भरोसा नहीं है। उनकी मांग पूरी तरह से जायज है।


तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा, "मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार इन कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी है।"


केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

उन्होंने कहा, "मैंने केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है, जिसमें मैंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वे जागें और इन कर्मचारियों के अधिकारों का सम्मान करें।"


पत्र में पंजाब सरकार ने कहा है कि केंद्र सरकार ने अचानक मनरेगा को बंद कर दिया है और नई योजना लागू की है, जिससे कर्मचारियों की आजीविका संकट में पड़ गई है।


कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग

पंजाब सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि नई योजना में ऐसा प्रावधान शामिल किया जाए जिससे इन सभी कर्मचारियों को नियमित किया जा सके। यह केवल पंजाब का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के कई कर्मचारी इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।


पंजाब सरकार इस संबंध में कर्मचारियों के साथ मजबूती से खड़ी है और मांग करती है कि केंद्र सरकार उन्हें स्थायी रोजगार प्रदान करे।