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पंजाब सरकार को बेअदबी कानून में संशोधन की आवश्यकता: जत्थेदार का आदेश

पंजाब विधानसभा के सिख विधायकों की पेशी के दौरान जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने बेअदबी कानून में संशोधन का आदेश दिया। विधायकों से सवाल पूछे गए, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका। जत्थेदार ने कहा कि सिखों से जुड़े मामलों में विधानसभा को निर्णय नहीं लेना चाहिए। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर और क्या हुआ।
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पंजाब विधायकों की पेशी और जत्थेदार का आदेश


श्री अकाल तख्त के सामने पेश हुए पंजाब के विधायकों को जत्थेदार का आदेश


अमृतसर में आज श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पंजाब विधानसभा के सिख विधायकों से बेअदबी कानून और सिख मर्यादा पर सवाल पूछे गए। इस पर कोई विधायक संतोषजनक उत्तर नहीं दे सका। जत्थेदार ने निर्देश दिया कि बेअदबी कानून में एक महीने के भीतर संशोधन किया जाए।


जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कानून पर छह आपत्तियां उठाईं। उन्होंने कहा कि सरकार को बेअदबी करने वालों के खिलाफ सजा देने के लिए कानून बनाना चाहिए, लेकिन सिख शब्दावली और पंथ से जुड़े मामलों में विधानसभा को निर्णय नहीं लेना चाहिए। इस कानून को तब तक रोकना चाहिए।


मुख्यमंत्री के बयानों का जिक्र

सुनवाई से पहले जत्थेदार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो वीडियो प्रस्तुत किए। सभी सिख मंत्री और विधायक नंगे पैर लिखित स्पष्टीकरण के साथ अकाल तख्त पहुंचे। कांग्रेस, अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी उपस्थित थे। जत्थेदार ने सीएम के बयानों का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि बेअदबी करने वाला मानसिक रोगी है, तो उसके माता-पिता या कस्टोडियन को सजा मिलेगी।


जत्थेदार ने आप के मंत्री-विधायकों से पूछा कि क्या यह बात कानून में शामिल है। कृषि मंत्री गुरमीत खुड्डियां इस पर स्पष्ट उत्तर नहीं दे सके। विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि इस सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह संवेदनशील मुद्दा है। जत्थेदार ने कहा कि सीएम ने ही हर कार्रवाई का लाइव टेलीकास्ट करने का निर्देश दिया था।


एसजीपीसी की राय की आवश्यकता

जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सरकार अपने कानून बना सकती है, लेकिन सिखों के लिए बनाए गए कानून में उनकी राय लेना आवश्यक है। यदि कानून में शोध किया गया है, तो हमें भी बुलाना चाहिए।


आप विधायक इंद्रवीर निज्जर ने कहा कि जब सुझाव मांगे गए थे, तब एसजीपीसी को बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि कमेटी की तरफ से कोई पत्र नहीं भेजा गया। कांग्रेस विधायक प्रताप बाजवा ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को सदन में उठाया था, लेकिन स्पीकर ने इसे नहीं माना।