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पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के खिलाफ असंतोष: 19 सांसदों ने उठाया सवाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के खिलाफ असंतोष की लहर उठ रही है। 19 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को हस्ताक्षरित पत्र सौंपा है, जिसमें कई प्रमुख नाम शामिल हैं। ऋतब्रत बनर्जी ने भी अपने गुट के 64 विधायकों का दावा किया है। क्या यह असंतोष तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित होगा? जानें इस राजनीतिक हलचल के पीछे की पूरी कहानी।
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के खिलाफ असंतोष: 19 सांसदों ने उठाया सवाल

राजनीतिक हलचल का नया दौर


कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में हाल के दिनों में काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के भीतर असंतोष की आवाजें तेज हो गई हैं। कुछ समय पहले विधायकों की नाराजगी की खबरें आई थीं, जिसमें पार्टी की रणनीतियों पर सवाल उठाए गए थे। अब, सांसदों के एक बड़े समूह के अलग रुख अपनाने की भी चर्चा हो रही है।


19 सांसदों की सूची का खुलासा

सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपा है। इस सूची में कई प्रमुख नाम शामिल हैं, जैसे अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी और दीपक अधिकारी। हालांकि, इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या

यह जानकारी राजनीतिक हलचल को और बढ़ा रही है। वर्तमान में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद हैं। यदि 19 सांसदों के अलग रुख की बात सही साबित होती है, तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व और सूची में शामिल सांसदों पर टिकी हुई हैं।


ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा बयान

इस बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और बागी गुट के प्रमुख ऋतब्रत बनर्जी ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अब 64 विधायक हैं और यह संख्या भविष्य में और बढ़ सकती है। उनका मानना है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के बजाय उनके गुट को असली तृणमूल कांग्रेस माना जाना चाहिए।


ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय करने का कोई इरादा नहीं है। उनका उद्देश्य पार्टी के भीतर अपनी राजनीतिक पहचान और ताकत को मजबूत करना है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब देखना होगा कि इन दावों में कितनी सच्चाई है और यह मामला किस दिशा में जाता है।