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बिजनौर के अल्ताफ की जिंदगी संकट में: किडनी ट्रांसप्लांट असफल, परिवार की आर्थिक स्थिति खराब

बिजनौर के नजीबाबाद निवासी अल्ताफ की जिंदगी गंभीर संकट में है। मां ने बेटे की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान की, लेकिन ट्रांसप्लांट असफल रहा। अब अल्ताफ को हर तीसरे दिन डायलिसिस की जरूरत है, और परिवार ने इलाज के लिए अपनी जमीन तक बेच दी है। जानें इस कठिनाई भरे सफर की पूरी कहानी।
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अल्ताफ की बीमारी और आर्थिक संकट

बिजनौर के नजीबाबाद में रहने वाले अल्ताफ की जिंदगी गंभीर बीमारी और वित्तीय संकट में उलझ गई है। अपने बेटे की जान बचाने के लिए मां शेरूनिका ने अपनी किडनी दान की, लेकिन अक्टूबर 2025 में मोहाली के एक निजी अस्पताल में हुआ ट्रांसप्लांट सफल नहीं हो सका। जब अल्ताफ की स्थिति बिगड़ी, तो परिवार ने उसे चंडीगढ़ के PGI में भर्ती कराया, जहां लगभग 8 दिन बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।


अल्ताफ ने करीब 5 साल तक अबू धाबी में ड्राइवर के रूप में काम किया। वहां उसे पैरों में दर्द और सूजन के बाद किडनी की बीमारी का पता चला। भारत लौटने पर डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी, जिसके लिए मां ने अपनी किडनी देने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में लगभग 7 लाख रुपये खर्च हुए।


इलाज के लिए जमीन बेचनी पड़ी


ट्रांसप्लांट के कुछ समय बाद अल्ताफ की तबीयत फिर से बिगड़ने लगी और प्रत्यारोपित किडनी ने काम करना बंद कर दिया। जुलाई 2026 में उसे फिर से PGI लाया गया। अब उसे हर तीसरे दिन डायलिसिस की आवश्यकता है। PGI में कम खर्च पर डायलिसिस के लिए नंबर नहीं आने पर परिवार को बाहर के सेंटर में लगभग 3 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। परिवार का कहना है कि अब तक इलाज में करीब 9.5 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, जिसके लिए एक बीघा जमीन भी बेची गई। चूंकि अल्ताफ बोल नहीं सकता, उसके पिता शाहिद उसकी देखभाल और इलाज का प्रबंध कर रहे हैं।


किडनी देने के बाद मां भी बीमार


बेटे को किडनी देने वाली शेरूनिका की तबीयत भी अब खराब रहती है। परिवार के अनुसार, उन्हें पेट में दर्द और बुखार की समस्या है। इस स्थिति में पिता शाहिद के सामने पत्नी और बेटे दोनों के इलाज की जिम्मेदारी है।