बीजेपी में बड़ा संगठनात्मक बदलाव: उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति
नई दिल्ली में बीजेपी का संगठनात्मक बदलाव
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गुरुवार को नए संगठन प्रभारियों की सूची जारी की, जिसमें कई प्रमुख नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जारी की गई सूची के अनुसार, शिवप्रकाश को राष्ट्रीय सह महामंत्री (संगठन) नियुक्त किया गया है, और उन्हें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा का प्रभार सौंपा गया है, जिसका मुख्यालय मुंबई होगा। वहीं, सौदान सिंह को बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है, जिसका केंद्र भुवनेश्वर होगा।
वरिष्ठ संगठनकर्ता वी. सतीश को पार्टी के एससी और एसटी मोर्चा के कार्यों के साथ-साथ संसदीय कार्यालय का प्रभार भी सौंपा गया है। वे दिल्ली से अपने कार्यों का संचालन करेंगे। इसके अलावा, नागेन्द्र को वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव
उत्तर प्रदेश किन-किन के हाथों में कमान
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में यह बदलाव अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धर्मपाल को प्रदेश महामंत्री (संगठन) के रूप में लखनऊ में बनाए रखा गया है, जबकि ब्रज क्षेत्र की जिम्मेदारी अभय गिरी को सौंपी गई है, जिनका केंद्र आगरा होगा। यह निर्णय ब्रज क्षेत्र में पार्टी को और मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
महाराष्ट्र में अजय जामवाल को प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त किया गया है, जबकि सतीश धोंड को महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में जनजाति संपर्क के साथ-साथ सह महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।
अन्य राज्यों की जिम्मेदारी
अन्य राज्यों की कौन संभालेगा जिम्मेदारी
अन्य राज्यों के लिए मधुकर को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, भीखूभाई दलसानिया को बिहार, पवन साई को झारखंड, रत्नाकर को गुजरात, चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश और कर्मवीर को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। पवन राणा को दिल्ली और हरियाणा, जबकि मंत्री श्रीनिवासुलु को पंजाब और चंडीगढ़ का जिम्मा सौंपा गया है। पश्चिम बंगाल में अमिताभ चक्रवर्ती और ओडिशा में मानस मोहंती संगठन का कार्य देखेंगे। बीजेपी का यह संगठनात्मक बदलाव 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नए चेहरों और अनुभवी संगठनकर्ताओं के माध्यम से राज्यों में अपनी पकड़ को मजबूत करना चाहती है।
