बैंक धोखाधड़ी में CBI की बड़ी कार्रवाई: संजीव दीक्षित को मिली सात साल की सजा
दिल्ली में बैंक धोखाधड़ी का मामला
नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक धोखाधड़ी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राउज एवेन्यू जिला न्यायालय ने संजीव दीक्षित, जिसे संजय शर्मा के नाम से भी जाना जाता है, को इस मामले में सात साल की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने उन पर एक लाख 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह निर्णय उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली को धोखा देने का प्रयास करते हैं।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए ऋण प्राप्ति
सीबीआई के अनुसार, संजीव दीक्षित ने पंजाब नेशनल बैंक की जोर बाग शाखा से चार करोड़ रुपये का नकद ऋण प्राप्त करने के लिए जाली संपत्ति दस्तावेजों का उपयोग किया। आरोप है कि इस राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य कार्यों में किया गया। सीबीआई ने 11 जुलाई 2013 को संजीव दीक्षित, संजय शर्मा, इंद्रा रानी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। संजीव दीक्षित वर्ष 2016 में सोनीपत की अदालत में एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक हिरासत से फरार हो गया था। उसे 23 नवंबर 2017 को अदालत ने घोषित अपराधी करार दिया।
सीबीआई की गिरफ्तारी
जनवरी 2026 में सीबीआई को सूचना मिली कि आरोपी गुजरात के वडोदरा में पंकज भारद्वाज के नाम से रह रहा है। जांच के दौरान उसका पता राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के उमराई स्थित माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर तक पहुंचा। सीबीआई ने 30 जनवरी 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया। सुनवाई के दौरान आरोपी ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों का उपयोग करने के आरोपों को स्वीकार किया। इसके बाद अदालत ने 24 अक्टूबर 2026 को उसे सात साल की कठोर सजा और जुर्माने की सजा सुनाई।
