ब्रजरज उत्सव में सुदेश भोसले का जादू: लोककला और संगीत का अद्भुत संगम
ब्रजरज उत्सव की रंगीन शाम
मथुरा: ब्रजरज उत्सव के दौरान सोमवार को संगीत और लोककला का शानदार आयोजन हुआ। धौली प्याऊ के रेलवे मैदान में प्रसिद्ध गायक और मिमिक्री कलाकार सुदेश भोसले ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके द्वारा गाए गए सदाबहार फिल्मी गीतों और सितारों की आवाज की हूबहू नकल ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। इसके साथ ही, लोकगीतों, कथक और चरकुला नृत्य ने ब्रज की समृद्ध संस्कृति को दर्शाया। वहीं, वृंदावन के स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में गीता शोध संस्थान के प्रशिक्षुओं ने रासलीला का मंचन कर भक्तिरस से दर्शकों को सराबोर किया।
सुदेश भोसले की मिमिक्री और सुरमई शाम
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित ब्रजरज उत्सव के चौथे दिन धौली प्याऊ रेलवे मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह से ही हो गई। दिन में लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया, जबकि शाम को सुदेश भोसले की म्यूजिकल इवनिंग ने सभी का ध्यान खींचा। भोसले, जो अमिताभ बच्चन जैसे कई फिल्मी सितारों की आवाज की मिमिक्री के लिए जाने जाते हैं, ने अपनी गायकी और अदाकारी से दर्शकों से भरपूर तालियां बटोरीं।
हेमा मालिनी के साथ युगल गीत और सम्मान
कार्यक्रम की शुरुआत सुदेश भोसले ने 'बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके ब्रजबाला' गीत से की। इसके बाद, अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी की उपस्थिति में उन्होंने 'क्या खूब लगती हो, बड़ी सुंदर दिखती हो' गीत प्रस्तुत किया। भोसले ने अपनी अनोखी शैली में सदाबहार फिल्मी गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय बना दिया। 'प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है' जैसे लोकप्रिय गीतों पर दर्शक झूमते नजर आए। देर रात तक गीत-संगीत का दौर चलता रहा और मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। कार्यक्रम के अंत में सांसद हेमा मालिनी, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, सीईओ लक्ष्मी नागप्पन, विप्रा सचिव आशीष कुमार सिंह और पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के सदस्य ठाकुर राजेंद्र सिंह ने सुदेश भोसले को सम्मानित किया।
लोकगीत, कथक और चरकुला नृत्य की छटा
सुदेश भोसले की प्रस्तुति से पहले मंच पर ब्रज की लोकसंस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। हकीम सिंह और गंगा रानी चतुर्वेदी ने लोकगीतों के माध्यम से लोकसंगीत की मिठास घोली। सरिता यादव ने कथक और लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं, दानी शर्मा ने ब्रज के पारंपरिक लोकनृत्यों के साथ चरकुला नृत्य प्रस्तुत कर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को ब्रज की लोकपरंपराओं से परिचित कराया।
स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में रासलीला का मंचन
वृंदावन स्थित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में गीता शोध संस्थान के प्रशिक्षुओं ने रासलीला का मंचन किया। संगीत, संवाद और अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का जीवंत चित्रण किया गया। इस प्रस्तुति में ब्रज की भक्ति परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के बाद उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के एसीईओ राजीव पांडेय, डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता अमरदीप, परिषद के सहायक अभियंता जेके जैन, चंद्रिका राय और अनूप शर्मा ने कलाकारों को सम्मानित किया।
मेले में खरीदारी, खानपान और रौनक का संगम
ब्रजरज उत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मेले की रौनक भी देखने लायक थी। धौली प्याऊ रेलवे मैदान में लगे विभिन्न स्टॉलों पर हस्तशिल्प, हथकरघा, खादी और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी के लिए लोग पहुंचे। खानपान के स्टॉलों पर लोगों ने विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया। मनोरंजन के आकर्षणों ने भी मेले की चहल-पहल बढ़ाई। गीत-संगीत, लोकनृत्य, खरीदारी और खानपान के बीच ब्रजरज उत्सव में संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिला।
