ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली मेट्रो में सुरक्षा अभ्यास: क्या है मॉक ड्रिल का महत्व?
दिल्ली मेट्रो में सुरक्षा तैयारियों का मॉक ड्रिल
नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आगमन से पहले, दिल्ली की मेट्रो पर सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी तैयारियों का एक प्रदर्शन किया। राजधानी के चार प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर अचानक ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे कि कोई आतंकी हमला हुआ हो या स्टेशन में कोई संदिग्ध बैग पड़ा हो। कुछ ही क्षणों में पुलिस, सीआईएसएफ, बम निरोधक दल, डॉग स्क्वॉड, दमकल और चिकित्सा टीमें सक्रिय हो गईं। यह सब कुछ असली नहीं था, बल्कि सुरक्षा तैयारियों का परीक्षण करने के लिए आयोजित एक बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल था।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान देश-विदेश से आने वाले मेहमानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, डीसीपी मेट्रो डॉ. आनंद डाभी के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस ने सीआईएसएफ, दिल्ली मेट्रो रेल निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर यह अभ्यास किया।
जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर दो काल्पनिक आतंकियों के हमले का दृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने तेजी से इलाके को घेर लिया और हमलावरों को काबू करने का अभ्यास किया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर आतंकी हमले के साथ घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और चिकित्सा सहायता प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
इसके बाद, धौला कुआं मेट्रो स्टेशन और आईजीआई एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन पर बिना टिकट वाले क्षेत्र में लावारिस सामान मिलने का परिदृश्य बनाया गया। संदिग्ध वस्तु की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने इलाके को सुरक्षित किया। इसके बाद बम निरोधक दल और प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की मदद से संदिग्ध वस्तु की जांच की गई।
इस मॉक ड्रिल में दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल पुलिस, सीआईएसएफ, दिल्ली मेट्रो, पुलिस नियंत्रण कक्ष, बम निरोधक एवं निष्क्रियकरण दल, डॉग स्क्वॉड, दिल्ली अग्निशमन सेवा, कैट्स एंबुलेंस, चिकित्सा एवं फोरेंसिक टीमें, यातायात पुलिस, विशेष प्रकोष्ठ और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जैसी कई एजेंसियों ने भाग लिया।
अभ्यास का उद्देश्य केवल जवानों की तत्परता का परीक्षण करना नहीं था, बल्कि यह देखना भी था कि किसी वास्तविक संकट के समय विभिन्न एजेंसियां कितनी तेजी से एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित कर सकती हैं। सूचना मिलने से लेकर इलाके की घेराबंदी, संदिग्ध वस्तु की जांच, हमलावरों से निपटने, घायलों की निकासी और चिकित्सा सहायता तक हर पहलू का परीक्षण किया गया।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, नियमित मॉक ड्रिल से सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों की पहचान होती है, मानक संचालन प्रक्रिया की समीक्षा की जाती है और जवानों को वास्तविक आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जाता है। ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में मेट्रो सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि मेट्रो राजधानी के महत्वपूर्ण क्षेत्रों और परिवहन केंद्रों को जोड़ती है।
डीसीपी मेट्रो डॉ. आनंद डाभी के अनुसार, इस प्रकार के अभ्यास से सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होती है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दिल्ली में बहुस्तरीय और तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है।
