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मथुरा में जिलाधिकारी की फर्जी फेसबुक आईडी का मामला: ठगी का खतरा बढ़ा

मथुरा में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह के नाम से एक फर्जी फेसबुक आईडी का मामला सामने आया है, जो उनके कार्यकाल में पांचवीं बार हुआ है। इस आईडी के माध्यम से लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी जा रही है, जिससे ठगी की आशंका बढ़ गई है। जिलाधिकारी ने इस फर्जी प्रोफाइल के बारे में चेतावनी दी है और लोगों से अपील की है कि वे ऐसी फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। जानें इस मामले में क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए।
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फर्जी फेसबुक आईडी का मामला


मथुरा: जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह के नाम और तस्वीर का उपयोग करके एक बार फिर से फर्जी फेसबुक आईडी बनाने की घटना सामने आई है। यह उनके कार्यकाल में इस प्रकार की पांचवीं घटना है। इससे पहले भी इस तरह के मामलों में थाना सदर बाजार में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। बार-बार हो रहे ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग गंभीर समस्या बनता जा रहा है।


ठगी की आशंका

फ्रेंड रिक्वेस्ट के माध्यम से लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश


फर्जी फेसबुक आईडी के जरिए लोगों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी जा रही हैं। यह आशंका जताई जा रही है कि आईडी बनाने वाला व्यक्ति जिलाधिकारी के नाम और फोटो का उपयोग करके लोगों का विश्वास जीतने के बाद उनसे पैसे मांग सकता है। हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी प्रकार की ठगी की पुष्टि नहीं हुई है। फर्जी प्रोफाइल के सामने आने के बाद लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


जिलाधिकारी की चेतावनी

फर्जी प्रोफाइल की जानकारी साझा की


जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने स्वयं इस फर्जी फेसबुक आईडी के बारे में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि उनके नाम से बनाई गई प्रोफाइल असली नहीं है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि ऐसी किसी भी फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें और न ही किसी के कहने पर पैसे भेजें। सोशल मीडिया पर उनके नाम से प्राप्त संदेशों की सत्यता की जांच अवश्य करें।


सतर्कता बरतें

आर्थिक लेनदेन से पहले जांच करें


जिलाधिकारी ने लोगों को चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर किसी अधिकारी के नाम और तस्वीर का उपयोग करके भेजे गए संदेशों पर बिना जांच-पड़ताल भरोसा न करें। किसी भी प्रकार के आर्थिक लेनदेन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करें। इस प्रकार की सतर्कता से साइबर ठगी की संभावनाओं को कम किया जा सकता है।