मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता: क्या है सरकार की योजना?
समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव
भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मॉनसून सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। इससे पहले, ड्राफ्ट कमेटी विभिन्न समुदायों और संगठनों से सुझाव लेकर मसौदे को अंतिम रूप देने में जुटी है।
सुझावों की प्रक्रिया
भोपाल में सुझावों का दौर
भोपाल के नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सोमवार को यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी ने राजनीतिक दलों, धार्मिक नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, आयोगों के प्रतिनिधियों और आम जनता से सुझाव लिए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विधेयक तैयार करने से पहले सभी पक्षों की राय को शामिल करना था।
इस कमेटी की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं, जिनके साथ पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह और अन्य कानूनी विशेषज्ञ भी मौजूद थे।
शादी और तलाक से जुड़े मुद्दे
शादी, तलाक और गोद लेने पर सुझाव
अधिकारियों के अनुसार, सबसे अधिक सुझाव शादी, तलाक, बच्चों की अभिरक्षा और गोद लेने से संबंधित विषयों पर प्राप्त हुए। विभिन्न विभागों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं और कानून के संभावित प्रभावों पर चर्चा की।
बैठक में भाजपा, कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। इसके अलावा, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध धर्मगुरुओं ने भी अपनी राय रखी।
आदिवासी समुदाय की चिंताएं
आदिवासी समुदाय और लिव-इन रिलेशनशिप पर चर्चा
कमेटी के समक्ष आदिवासी समाज से जुड़े कई सुझाव भी आए। कुछ लोगों ने अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की मांग की। वहीं, कुछ धर्मगुरुओं ने लिव-इन रिलेशनशिप पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई। कमेटी के सदस्यों का कहना है कि वेबसाइट और अन्य माध्यमों से लाखों सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनका अध्ययन किया जा रहा है।
कांग्रेस की आलोचना
कांग्रेस ने उठाए सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने यूसीसी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राज्य में बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याएं गंभीर हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूसीसी को आगे बढ़ा रही है।
मॉनसून सत्र की प्रतीक्षा
मॉनसून सत्र पर टिकी नजरें
यूसीसी को लेकर सुझाव देने की प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद, सरकार विधानसभा के मॉनसून सत्र में विधेयक पेश कर सकती है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
