मानसिक स्वास्थ्य पर 'मन महोत्सव': नई दिल्ली में जागरूकता का अनोखा अभियान
नई दिल्ली में मानसिक स्वास्थ्य की नई पहल
नई दिल्ली: जीवन की तेज रफ्तार, तनाव और दबे हुए जज्बातों के बीच अगर कोई कहे कि 'आप अकेले नहीं हैं', तो यह एक नई उम्मीद की किरण बन जाती है। इसी भावना को साकार करते हुए वर्धमान महावीर चिकित्सा महाविद्यालय (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल ने 'मन महोत्सव-मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2026' का आयोजन किया। यह छह दिवसीय कार्यक्रम 5 से 10 अक्टूबर तक चला, जिसमें जागरूकता, कला, संवाद और संवेदनशीलता के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करने का संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज वर्मा ने किया, जबकि अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बंबा ने मार्गदर्शन किया। सप्ताह के दौरान, डॉ. निशांत गोयल ने प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे मनोचिकित्सा बाह्य रोगी विभाग में जनव्याख्यान के जरिए मरीजों और आगंतुकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।
सवालों की जंग और रंगों की अभिव्यक्ति
इस महोत्सव की शुरुआत 5 अक्टूबर को स्नातक छात्रों की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता से हुई। 6 अक्टूबर को मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता मार्च का आयोजन किया गया, जिसमें अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। उसी दिन भांग के वैधीकरण से संबंधित चिकित्सकीय, सामाजिक, कानूनी और जनस्वास्थ्य पहलुओं पर वाद-विवाद प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। 7 अक्टूबर को बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता और एमबीबीएस छात्रों के लिए कैनवास चित्रकारी गतिविधि का आयोजन हुआ, जिससे भावनाओं को रंगों के माध्यम से व्यक्त करने का अवसर मिला। 8 अक्टूबर को मुक्त मंच कार्यक्रम में छात्रों ने अपनी प्रतिभा और अनुभव साझा किए। 9 अक्टूबर को नर्सिंग छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य पर पोस्टर बनाकर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता का संदेश
10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर नजफगढ़ स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र में संवादात्मक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र और आम जनता के लिए संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मनोचिकित्सा और सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने मिलकर भागीदारी की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनीता खोखर के नेतृत्व में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के रेजिडेंट चिकित्सकों और प्रशिक्षुओं ने किया। संगोष्ठी में अवसाद और चिंता के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर विशेषज्ञ से परामर्श, तनाव प्रबंधन, स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक बीमारी से जुड़े भ्रमों को दूर करने पर जोर दिया गया। एमबीबीएस छात्रों की नाट्य समिति ने नशे के दुष्प्रभावों पर नाटक प्रस्तुत किया। वरिष्ठ रेजिडेंट चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
मानसिक स्वास्थ्य का महत्व
डॉ. कविता शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य से अलग नहीं किया जा सकता। अस्पताल, शिक्षण संस्थान और समुदाय में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां लोग बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें। डॉ. चारू बंबा ने भी कहा कि मरीजों, चिकित्सकों, नर्सों और छात्रों को बिना किसी भय या भेदभाव के अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। कार्यक्रम में मनोचिकित्सा विभाग के वरिष्ठ एवं स्नातकोत्तर रेजिडेंट चिकित्सकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
