यमुना एक्सप्रेसवे पर विराट संत महासंसद: धर्म, संस्कृति और एकता का संदेश
महासंसद का भव्य आयोजन
उत्तर प्रदेश: अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे के नीचे विराट संत महासंसद और दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्व हिंदू महासंघ भारत द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से संत-महात्माओं, महामंडलेश्वरों और धर्माचार्यों ने भाग लिया। उन्होंने धर्म, संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण का संदेश साझा किया। इस महासंसद का मुख्य उद्देश्य 'धर्मो रक्षति रक्षितः' और 'एक संकल्प–एक मंच–एक आवाज' था। कार्यक्रम की शुरुआत संतों की शोभायात्रा से हुई, जिसके बाद धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें संतों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। अंत में, श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में महाप्रसाद ग्रहण किया।
स्वामी बालकनंद गिरि और साध्वी प्रज्ञा भारती का संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता आनंद पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी बालकनंद गिरि जी महाराज ने की। उन्होंने युवाओं में सनातन परंपराओं और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को जागृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि युवाओं को धर्म के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्रहित में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। साध्वी प्रज्ञा भारती ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता का महत्व बताते हुए कहा कि सनातन धर्म भारत की धुरी है। उन्होंने जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एकजुट होने का आह्वान किया और 'संगच्छध्वं संवदध्वम्' के वैदिक मंत्र को जन-जन तक पहुंचाने की बात कही।
आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता पर जोर
महासंसद में स्वामी धर्मदेव जी, पीठाधीश्वर योगी मिथलेश नाथ जी, महामंडलेश्वर स्वामी वेद मूर्ति गिरी जी, स्वामी उमाकांत नंद जी, स्वामी रामबालक दास जी, महामंडलेश्वर राजेश्वर दास जी, पीठाधीश्वर अनिल कृष्ण जी, स्वामी देव आनंद जी, स्वामी सत्य मित्रानन्द और पीठाधीश्वर मोहिनी बिहारी शरण जी जैसे कई संत-महात्मा उपस्थित रहे। आयोजन के संयोजक महामंडलेश्वर स्वामी श्री सत्यानंद गिरि जी महाराज ने संतों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ समाज को जोड़ना और राष्ट्र निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लेना इस महासंसद का मुख्य उद्देश्य है। इस आयोजन में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित के संदेश पर विशेष ध्यान दिया गया।
