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युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव से जागरूक करने का संदेश

संस्कृति संसद-2026 के जेन-जी कॉन्क्लेव में युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव और नैरेटिव की राजनीति के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने बताया कि बिना जांचे-परखे जानकारी स्वीकार करना हानिकारक हो सकता है। मुख्य अतिथि नीरजा माधव ने युवाओं की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि उन्हें अपनी ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया की चुनौतियों और युवाओं की जिम्मेदारियों पर विचार साझा किए। जानें इस महत्वपूर्ण चर्चा के बारे में और कैसे युवा अपनी सोच को मजबूत कर सकते हैं।
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संस्कृति संसद-2026 में युवाओं की भूमिका पर चर्चा


वाराणसी। संस्कृति संसद-2026 के अंतर्गत आयोजित जेन-जी कॉन्क्लेव में युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव, नैरेटिव की राजनीति और मीडिया लिटरेसी के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के भाजपा युवा विधायक संतु पान, टाटा पावर के सोशल इम्पैक्ट ग्रुप के प्रमुख भारत छाबड़ा और आईआईटी बीएचयू के पूर्व छात्र बृजेश मानव ने अपने विचार साझा किए। ‘नैरेटिव और मीडिया लिटरेसी’ विषय पर चर्चा में वक्ताओं ने बताया कि सोशल मीडिया पर फैली हर जानकारी को बिना जांचे-परखे स्वीकार करना युवाओं के लिए हानिकारक हो सकता है। युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए।


कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नीरजा माधव ने कहा कि भारत युवाओं का देश है। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में भारत के युवाओं के पास राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर है। उनकी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र को मजबूत बनाने में होना चाहिए, न कि इसके विखंडन में। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया पर जेन-जी के नाम पर विभिन्न समूह बन रहे हैं। कई बार युवा नारेबाजी करते हैं, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट नहीं होता कि वे किस उद्देश्य के लिए ऐसा कर रहे हैं।


नीरजा माधव ने यह भी कहा कि कुछ देश विरोधी शक्तियां युवकों की भावनाओं और ऊर्जा का उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए करती हैं। युवाओं को भटकाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश की जाती है। ऐसे में उन्हें किसी के बहकावे में आने के बजाय अपनी समझ और विवेक से निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया ने भारतीय युवाओं को काफी नुकसान पहुंचाया है। युवाओं का मूल्यांकन उनके समूह, विचारधारा या नारेबाजी से नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा, मेधा और कार्यक्षमता के आधार पर होना चाहिए।


वहीं, टाटा पावर के सोशल इम्पैक्ट ग्रुप के प्रमुख भरत छाबड़ा ने कहा कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध सूचनाएं हमारी सोच और विचारों को लगातार प्रभावित करती हैं। अधूरी जानकारी, चुनिंदा तथ्यों और भ्रामक आंकड़ों के माध्यम से किसी भी मुद्दे पर लोगों की राय बनाई जा सकती है। इसलिए युवाओं को सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर सूचना के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना को स्वीकार करने से पहले उसे दो कसौटियों पर जरूर परखें। पहली, क्या वह सूचना सकारात्मक है और दूसरी, क्या वह समाज और राष्ट्र के हित में है?


उन्होंने सोशल मीडिया के एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली समझाते हुए कहा कि यूजर जिस तरह की सामग्री पर अधिक समय बिताता है, प्लेटफॉर्म उसी तरह की सामग्री बार-बार उसके सामने लाने लगते हैं। इससे व्यक्ति एक ही तरह के विचारों और सूचनाओं के दायरे में सिमट सकता है। युवा अनजाने में घंटों रील देखने में बिता देते हैं। इसका असर उनकी एकाग्रता, पढ़ने की आदत और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ सकता है।


कार्यक्रम में शिवान पाल, प्रतीक शर्मा, युवराज पोखल और अंजलि सारस्वत ने भी विषय पर अपने विचार रखे। मंच पर राजन जी और अंगद जी मौजूद रहे। संचालन शेफाली कश्यप ने किया।