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राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की राह में आरक्षण की बाधा

राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया में आरक्षण की बाधा बनी हुई है। उच्च न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया को 31 जुलाई तक पूरा करने का आदेश दिया है, लेकिन आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया अभी अधूरी है। राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच पत्राचार जारी है, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है और आगे की संभावनाएं क्या हैं।
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चुनाव प्रक्रिया में देरी का कारण


जयपुर: राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। उच्च न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया को 31 जुलाई तक पूरा करने का आदेश दिया है, लेकिन आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं हो पा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सरकार और ओबीसी आयोग के बीच पत्राचार जारी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।


हाईकोर्ट के निर्देश

22 मई को उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 तक पूरी की जाए। इसके बाद, राज्य निर्वाचन आयोग ने 1 जून को पंचायतीराज और स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का अनुरोध किया।


निर्वाचन आयोग का पत्र

निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि राजस्थान पंचायतीराज निर्वाचन नियम, 1994 और नगरीय स्वशासन निर्वाचन नियम, 1994 के अनुसार अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए आरक्षण तय होने के बाद ही चुनाव कराए जा सकते हैं।


जब पहले पत्र का कोई उत्तर नहीं मिला, तो आयोग ने 15 जून को दोनों विभागों को रिमाइंडर भेजा और प्रक्रिया में तेजी लाने की अपील की। इसके बाद 16 जून को ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ओबीसी आरक्षण के लिए आवश्यक 'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।


सरकार की जिम्मेदारी

23 जून को राज्य निर्वाचन आयोग ने एक और पत्र भेजकर कहा कि ट्रिपल टेस्ट कराने के लिए गठित आयोग राज्य सरकार के अधीन है, इसलिए उसकी रिपोर्ट समय पर प्राप्त करना और उसके आधार पर आरक्षण तय करना सरकार की जिम्मेदारी है। आयोग ने दोहराया कि आरक्षण निर्धारण की सूचना मिलने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जा सकेगी।


आगे की स्थिति

नगरीय निकाय चुनावों की स्थिति भी लगभग यही है। स्वायत्त शासन विभाग ने ओबीसी आयोग से ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इस बीच, 29 जून को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के बीच हुए पत्राचार की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजरें सरकार और ओबीसी आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों का रास्ता साफ हो सकेगा।