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वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से धार्मिक गतिविधियों पर असर, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे घाटों पर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा उपायों को कड़ा करते हुए नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। रत्नेश्वर महादेव मंदिर, जो अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए जाना जाता है, बाढ़ के पानी में डूब चुका है। स्थानीय लोगों को आवाजाही में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जानें इस स्थिति के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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गंगा नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है


नई दिल्ली: वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे घाटों पर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, गंगा का जलस्तर लगभग 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है। वर्तमान में, नदी का जलस्तर 62.4 मीटर है, जो चेतावनी और खतरे के स्तर से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।


घाटों पर जलस्तर का प्रभाव

जलस्तर में वृद्धि का प्रभाव शहर के कई प्रमुख घाटों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। पक्के घाटों की सीढ़ियां धीरे-धीरे पानी में डूबने लगी हैं, और किनारे पर स्थित कई छोटे-बड़े मंदिर भी जलमग्न हो रहे हैं। मणिकर्णिका घाट पर स्थित प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जो बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुका है।


रत्नेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता

रत्नेश्वर महादेव मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर लगभग 9 डिग्री के कोण पर झुका हुआ है, जिसके कारण इसे अक्सर इटली की झुकी मीनार से तुलना की जाती है। हर साल जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, तो यह मंदिर पानी में समा जाता है, जिससे यह श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है।


स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलस्तर में वृद्धि के कारण घाटों के बीच आवागमन प्रभावित हुआ है। पुरोहितों और नाविकों के अनुसार, कई घाटों का आपसी संपर्क टूटने लगा है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवाजाही में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।


सुरक्षा उपायों में वृद्धि

स्थिति को देखते हुए, जिला प्रशासन ने सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया है। गंगा में पतवार से चलने वाली नावों के संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, मोटरबोट संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित क्षमता से कम यात्रियों को बैठाएं और सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य करें। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर रखे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा, तो अतिरिक्त सुरक्षा और राहत संबंधी कदम उठाए जाएंगे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।