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वृंदावन का पब्लिक जूनियर हाईस्कूल: शिक्षा की धरोहर संकट में

वृंदावन का पब्लिक जूनियर हाईस्कूल, जो पिछले 90 वर्षों से शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, अब अस्तित्व के संकट में है। सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट द्वारा भूमि खाली कराने के नोटिस के बाद विद्यालय प्रबंधन ने चिंता जताई है कि इससे सैकड़ों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। प्रधानाचार्य ने विद्यालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके महत्व पर जोर दिया है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और विद्यालय के भविष्य के बारे में क्या हो रहा है।
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वृंदावन में शिक्षा का संकट


वृंदावन: इस तीर्थनगरी में लगभग 90 वर्षों से शिक्षा का प्रकाश फैलाने वाला ब्रह्मकुंड स्थित पब्लिक जूनियर हाईस्कूल अब अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। 1934 में ग्वालियर के महाराजा द्वारा विद्यालय के लिए दी गई भूमि को खाली कराने के लिए सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट ने नोटिस जारी किया है, जिससे विवाद बढ़ गया है। यह मामला अब न्यायालय और प्रशासनिक स्तर पर पहुंच चुका है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस कार्रवाई से सैकड़ों छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


विद्यालय का ऐतिहासिक महत्व


इस विद्यालय का इतिहास ब्रिटिश शासन के समय से जुड़ा हुआ है। 1934 में ग्वालियर के महाराजा ने राधागोपाल मंदिर के पास विद्यालय के संचालन के लिए भूमि उपलब्ध कराई थी। तब से यहां क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, पिछले नौ दशकों में यहां पढ़े कई छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


प्रधानाचार्य का बयान


प्रधानाचार्य धीरज सिंह ने आरोप लगाया कि 3 जुलाई को सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट से जुड़े व्यक्तियों ने विद्यालय की छत को नुकसान पहुंचाया था। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मरम्मत कराई गई। उनका कहना है कि भूमि खाली कराने के नोटिस और विवाद के कारण अभिभावकों में विद्यालय के भविष्य को लेकर चिंता है, जिसका असर इस सत्र में प्रवेश पर पड़ा है।


शैक्षिक धरोहर की रक्षा की अपील


प्रधानाचार्य ने कहा कि जबकि सरकारें शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, यह पुराना विद्यालय अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि वृंदावन की शैक्षिक धरोहर का हिस्सा है, जहां से कई पीढ़ियों ने शिक्षा प्राप्त की है। भूमि विवाद का समाधान इस प्रकार होना चाहिए कि विद्यालय का संचालन जारी रहे और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। भूमि को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद अब कानूनी प्रक्रिया में है। विद्यालय प्रबंधन न्यायालय और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रखे हुए है, जिससे इस 90 वर्षीय शिक्षण संस्थान के भविष्य को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बनी हुई है।