सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों ने बढ़ाया मदद का हाथ
सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा पर चिंता
नई दिल्ली: सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद, दक्षिणी दिल्ली में रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षा और आवास की चिंता बढ़ गई है। इस कठिन समय में, दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों ने सहायता के लिए कदम बढ़ाए हैं। श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, राम लाल आनंद कॉलेज और शहीद भगत सिंह कॉलेज जैसे संस्थानों ने प्रभावित विद्यार्थियों के लिए ठहरने और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने की व्यवस्था की है।
कॉलेजों ने छात्रों के लिए ठहरने की व्यवस्था की
कॉलेजों ने छात्रों के लिए हॉस्टल और खाली कक्षाओं में ठहरने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही, भोजन और अन्य आवश्यक चीजों के लिए कॉलेज कैंटीन का उपयोग करने की अनुमति भी दी गई है। श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ने रविवार शाम से ही विद्यार्थियों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था शुरू कर दी थी।
10 कमरे खाली कर छात्रों को सुरक्षित स्थान दिया
श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ने आसपास के पीजी में रहने वाले छात्रों को सुरक्षित स्थान प्रदान करने के लिए अपने 10 कमरे खाली कर दिए। इन कमरों में हादसे के बाद डरे हुए छात्रों के ठहरने की व्यवस्था की गई। कॉलेज प्रशासन ने यह कदम उठाया ताकि प्रभावित विद्यार्थियों को तुरंत सुरक्षित स्थान मिल सके।
कॉलेज के प्राचार्य वी. रवि ने बताया कि रविवार रात कुल 46 छात्र और 26 छात्राएं कॉलेज में शरण लेने आए। ये सभी विद्यार्थी सत्य निकेतन और उसके आसपास के पीजी में निवास करते हैं।
डीयू के सभी कॉलेजों के छात्र ले सकते हैं मदद
प्राचार्य वी. रवि ने कहा कि सत्य निकेतन में रहने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी भी कॉलेज के विद्यार्थी जरूरत पड़ने पर श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में आकर रुक सकते हैं। कॉलेज ने प्रभावित छात्रों की सहायता के लिए कोई पाबंदी नहीं रखी है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की मदद के लिए कॉलेज के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। स्टूडेंट वालंटियर्स भी राहत कार्य में शामिल हैं।
दूसरे कॉलेजों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ
सत्य निकेतन हादसे के बाद, दक्षिणी दिल्ली के अन्य कॉलेजों ने भी प्रभावित विद्यार्थियों के लिए अपने संसाधन उपलब्ध कराने शुरू कर दिए हैं। हॉस्टल, कक्षाओं और कैंटीन जैसी सुविधाओं का उपयोग छात्रों की सहायता के लिए किया जा रहा है। इससे हादसे के बाद असुरक्षित महसूस कर रहे विद्यार्थियों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद है।
