सफदरजंग अस्पताल का अनोखा अभियान: कागज पुनर्चक्रण से पर्यावरण की रक्षा
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
नई दिल्ली: जब छोटे प्रयास बड़े संकल्पों में बदलते हैं, तो वे बदलाव की नई कहानी लिखते हैं। इसी सोच को साकार करते हुए वर्धमान महावीर चिकित्सा महाविद्यालय और सफदरजंग अस्पताल ने विशेष अभियान-6 के तहत कागज पुनर्चक्रण और स्थान के बेहतर उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अस्पताल की कायाकल्प इकाई ने पुराने और अनुपयोगी रजिस्टरों को पुनः संसाधित करके पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाया है।
पुराने कागज को नया जीवन
इस पहल का नेतृत्व अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने किया, जबकि चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बाम्बा और प्राचार्य डॉ. गीतिका खन्ना ने निरंतर प्रोत्साहन दिया। कायाकल्प इकाई के प्रभारी डॉ. मालिनी आर. कपूर की देखरेख में सामान्य भंडार विभाग और 'वाय वेस्ट वेडनेसडे फाउंडेशन' के सहयोग से पुराने रजिस्टरों के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
पुनर्चक्रण से 31 पेड़ों की रक्षा
इस अभियान के तहत 2,552 किलोग्राम अनुपयोगी रजिस्टरों के बदले पुनर्चक्रित कागज उपलब्ध कराया गया, जिसका उपयोग अस्पताल के विभिन्न विभागों में किया जाएगा। इससे न केवल कागज की उपलब्धता में सुधार होगा, बल्कि पुराने रजिस्टरों के ढेर से घिरी जगह का बेहतर उपयोग भी संभव होगा।
कायाकल्प मंथन के अनुसार, इस पहल से लगभग 31 पेड़ों की रक्षा, 3,216 किलोग्राम लकड़ी और 45,936 लीटर पानी के संरक्षण में मदद मिलेगी, साथ ही 1,378 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। ये आंकड़े कागज के पुनर्चक्रण के पर्यावरणीय महत्व को दर्शाते हैं।
स्वच्छता और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग
यह पहल केवल पुराने कागजों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पताल परिसर में स्वच्छता और सुव्यवस्थित भंडारण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे चिकित्सा संस्थानों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने और टिकाऊ कार्यप्रणाली अपनाने की प्रेरणा मिलती है। टीम सफदरजंग का संदेश स्पष्ट है: कचरा समझकर न फेंकें, संसाधन समझकर पुनः उपयोग करें।
