सफदरजंग अस्पताल ने मनाया 100वें आईवीएफ शिशु का जन्म, खुशियों का नया अध्याय
नई दिल्ली में ऐतिहासिक उपलब्धि
नई दिल्ली: कई परिवारों की आंखों में संतान की चाहत के आंसू थे, और कुछ ने वर्षों से एक नन्ही किलकारी सुनने की उम्मीद की थी। चिकित्सा विज्ञान और उम्मीद के इस संगम ने शनिवार को वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल में एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा। अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने आईवीएफ के माध्यम से अपने 100वें शिशु के जन्म के साथ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया। 3 अक्टूबर 2026 का दिन अस्पताल के लिए विशेष था, क्योंकि इसी दिन भारत के पहले आईवीएफ शिशु कनुप्रिया अग्रवाल का जन्म हुआ था, जिन्हें प्यार से 'दुर्गा' कहा जाता है। सफदरजंग अस्पताल ने इस दिन अपनी आईवीएफ यात्रा के 100वें सफल जन्म का जश्न मनाया।
100 परिवारों की खुशियों की कहानी
सिर्फ आंकड़ा नहीं, 100 परिवारों की खुशियों की कहानी
सफदरजंग अस्पताल के आईवीएफ केंद्र की यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि उन परिवारों की उम्मीद, संघर्ष और खुशियों की कहानी है, जिन्होंने माता-पिता बनने के सपने को साकार करने के लिए चिकित्सा विज्ञान का सहारा लिया। अस्पताल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में आईवीएफ के माध्यम से जन्म लेने वाले बच्चे अपने माता-पिता के साथ पहुंचे, जिससे माहौल भावुक हो उठा। जिन बच्चों को कभी आईवीएफ उपचार के दौरान उम्मीद की किरण के रूप में देखा गया था, वे आज स्वस्थ और मुस्कुराते हुए अपने सामने थे, जिससे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई।
आईयूआई से आईवीएफ और आईसीएसआई तक सेवाएं
आईयूआई से आईवीएफ और आईसीएसआई तक सेवाएं
वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल का आईवीएफ केंद्र दंपतियों को संतान प्राप्ति की दिशा में आधुनिक और व्यापक सहायक प्रजनन सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यहां अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई), इन-विट्रो निषेचन (आईवीएफ) और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। यह केंद्र उन दंपतियों के लिए उम्मीद की किरण बना है, जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से माता-पिता बनने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
डॉ. कविता शर्मा ने दी बधाई
निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने टीम को दी बधाई
इस ऐतिहासिक अवसर पर वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आईवीएफ के जरिए जन्म लेने वाले बच्चों को उनके परिवारों के साथ अस्पताल में देखकर उन्हें बेहद संतोष और खुशी मिलती है। उन्होंने अस्पताल पर भरोसा जताने वाले सभी परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया और आईवीएफ टीम के समर्पण और मेहनत की सराहना की।
डॉ. चारू बंबा ने बढ़ाया हौसला
मेडिकल अधीक्षक डॉ. चारू बंबा ने बढ़ाया हौसला
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बंबा ने आईवीएफ के जरिए माता-पिता बने सभी परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए पूरी आईवीएफ टीम की सराहना करते हुए कहा कि विशेष सहायक प्रजनन सेवाओं को निरंतर बेहतर तरीके से उपलब्ध कराना अस्पताल की प्राथमिकताओं में शामिल है।
डॉ. ज्योत्स्ना सूरी का योगदान
डॉ. ज्योत्स्ना सूरी के योगदान को भी किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्स्ना सूरी के योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। आईवीएफ कार्यक्रम के निरंतर संचालन में उनके योगदान की सराहना की गई।
कार्यक्रम का समन्वय
डॉ. बिंदु बजाज ने संभाली कार्यक्रम की कमान
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का नेतृत्व एवं समन्वय डॉ. बिंदु बजाज ने किया। आईवीएफ केंद्र के संचालन और विकास से लंबे समय से जुड़ी डॉ. बजाज ने 100वें सफल आईवीएफ जन्म के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की योजना और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभी की मेहनत का नतीजा
डॉक्टरों से लेकर नर्सों तक, सभी की मेहनत का नतीजा
इस सफलता के पीछे केवल एक डॉक्टर या एक विभाग नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य टीम की सामूहिक मेहनत रही। आईवीएफ टीम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। 100वें सफल जन्म तक पहुंचना इसी सामूहिक समर्पण और लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है।
उम्मीद के बच्चे अस्पताल में लौटे
जब अस्पताल में लौटे 'उम्मीद के बच्चे'
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब आईवीएफ के जरिए जन्म लेने वाले बच्चे अपने परिवारों के साथ अस्पताल पहुंचे। जिन परिवारों के लिए संतान का सपना अधूरा था, आज उन्हीं की गोद में खेलते बच्चों ने पूरे माहौल को खुशियों से भर दिया। सफदरजंग अस्पताल में आईवीएफ से जन्म लेने वाले 100वें बच्चे की उपलब्धि ने अस्पताल की चिकित्सा यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
